पश्चिम बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की हत्या की कथित साज़िश की जांच के दौरान पाकिस्तान स्थित एक नेटवर्क से जुड़े कथित व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है। आरोपी की पहचान हामिद मंडल के तौर पर हुई है। उसे STF और बर्दवान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) के संयुक्त ऑपरेशन में पूर्वी बर्दवान में बर्दवान हाईवे के पास एक बड़े रिहायशी हाउसिंग कॉम्प्लेक्स से गिरफ़्तार किया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मंडल ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों की नज़र से बचने के लिए इस हाउसिंग कॉम्प्लेक्स को छिपने की जगह के तौर पर चुना था। जांचकर्ताओं का दावा है कि वह पाकिस्तान स्थित शहज़ाद भट्टी से जुड़ा है, जिसके पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) से संबंध होने का आरोप है। अधिकारी अब अधिकारी को निशाना बनाने की कथित साज़िश में मंडल की भूमिका की जांच कर रहे हैं और भारत में उसकी गतिविधियों के दायरे का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
पाकिस्तान स्थित शहज़ाद भट्टी से जुड़ा
पुलिस सूत्रों ने बताया कि मंडल ने मुख्यमंत्री के दौरे से जुड़ी जानकारी जुटाई थी और 9 तारीख से ही मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के शेड्यूल पर बारीकी से नज़र रख रहा था। जांचकर्ता ऑपरेशन के दौरान मिली जानकारी का विश्लेषण कर रहे हैं और आरोपी से पूछताछ कर रहे हैं ताकि इन जानकारियों को इकट्ठा करने का मकसद और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में पता लगाया जा सके।
अधिकारियों ने मंडल को कश्मीर स्थित ऑपरेटिव भी बताया है। जांच अब उसके संपर्कों का पता लगाने और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने पर केंद्रित है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, शहज़ाद भट्टी उस नेटवर्क का मुख्य व्यक्ति है जिससे मंडल कथित तौर पर जुड़ा था। मूल रूप से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला भट्टी सोशल मीडिया पर एक व्यवसायी, समाज सेवक और धार्मिक मुद्दों पर टिप्पणी करने वाले व्यक्ति के तौर पर जाना जाता है। हालांकि, एजेंसियों का आरोप है कि उसकी गतिविधियां उसकी ऑनलाइन छवि से कहीं ज़्यादा हैं।
एजेंसियों द्वारा बताए गए पाकिस्तानी पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 2013 में भट्टी के खिलाफ चोरी और डकैती समेत कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। बाद में उस पर रेप का भी आरोप लगा। बताया जाता है कि 2015 के आसपास उसने पाकिस्तान छोड़ दिया और दुबई चला गया, जहां उसने डेयरी का कारोबार शुरू किया। वहां रहने के दौरान, वह कथित तौर पर बलूचिस्तान के फारूक खोखर गैंग के संपर्क में आया और आखिरकार उसका एक अहम सदस्य बन गया। एजेंसियों का दावा है कि बाद में भट्टी ने “333” नाम से सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी बढ़ाई और भारत-पाकिस्तान संबंधों, धार्मिक मुद्दों और इन्फ्लुएंसर्स से जुड़े विवादों पर कंटेंट पोस्ट किया। हालांकि उसने बड़ी संख्या में ऑनलाइन फॉलोअर्स बनाए, लेकिन जांचकर्ताओं का मानना है कि इस लोकप्रियता ने उसे एक बड़ा नेटवर्क बनाने में भी मदद की।
प्राइवेट मैसेज के जरिए शुरुआती संपर्क
भारतीय एजेंसियों का आरोप है कि भट्टी अकेले काम नहीं करता है और उसे आबिद जट्ट, अजमल गुज्जर और यावर खान जैसे हैंडलर्स का समर्थन प्राप्त है। उनका यह भी दावा है कि यह नेटवर्क भारत में आसानी से प्रभावित होने वाले युवाओं की पहचान करने के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता है। प्राइवेट मैसेज के जरिए शुरुआती संपर्क के बाद, कथित तौर पर इन लोगों को वीडियो कॉल के जरिए भट्टी से जोड़ा जाता है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, इन लोगों को पैसे, सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और विदेश में बसने के अवसरों का लालच दिया जाता है। उन्हें पहले आसान काम सौंपे जाते हैं, जैसे कि खास जगहों की तस्वीरें या वीडियो शेयर करना। एजेंसियों का दावा है कि जैसे-जैसे ये लोग नेटवर्क में और गहरे तक जुड़ते जाते हैं, ये काम धीरे-धीरे और गंभीर होते जाते हैं।
एसटीएफ (STF) अपनी जांच के तहत हामिद मंडल से पूछताछ कर रही है। अधिकारी उसकी कथित भूमिका का पूरा दायरा तय करने, उसके संपर्कों की पहचान करने और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस संदिग्ध साजिश के तार कहीं और भी जुड़े थे। जांच अभी जारी है।
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