18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से ठीक पहले शुक्रवार, 11 सितंबर को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक आयोजित होगी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इस द्विपक्षीय वार्ता की पुष्टि करते हुए भारत के साथ रूस के मजबूत और रणनीतिक संबंधों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच अधिकांश व्यापारिक भुगतान अब अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में किया जा रहा है। इसके साथ ही सुरक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा, परिवहन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में दोनों देशों का आपसी सहयोग लगातार विस्तार ले रहा है।
युद्ध और फारस की खाड़ी का मुद्दा रहेगा हावी
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की इस बैठक में द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा होगी। एक तरफ जहां भारतीय कंपनियां रूसी बाजार में गहरी रुचि दिखा रही हैं, वहीं रूस भी भारतीय बाजार में अपने व्यवसायों का विस्तार करने का इच्छुक है। इसके अलावा बैठक में अंतरराष्ट्रीय परिवहन परियोजनाओं, रूस-यूक्रेन युद्ध की वर्तमान स्थिति और फारस की खाड़ी के संकट पर बात होगी। रूस का मानना है कि खाड़ी देश के घटनाक्रम का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
रूस-यूक्रेन संकट पर भारत की मध्यस्थता का रूस ने किया स्वागत
रूस-यूक्रेन संकट को हल करने में भारत की संभावित मध्यस्थता पर बोलते हुए पेसकोव ने कहा कि मॉस्को, नई दिल्ली के रुख से भली-भांति अवगत है, जो काफी हद तक रूस के दृष्टिकोण से मेल खाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस इस मुद्दे को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का पक्षधर है। रूस ने विवाद को खत्म करने के लिए भारत की मदद की इच्छा और अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रयासों सहित सभी अंतरराष्ट्रीय पहलों का स्वागत किया है। पेसकोव ने उम्मीद जताई कि रूस, यूक्रेन और अमेरिका को शामिल करते हुए वार्ता फिर से शुरू हो सकती है।
परमाणु ऊर्जा और कुडनकुलम परियोजना में नए विकास की उम्मीद
पेसकोव ने परमाणु ऊर्जा को भारत-रूस सहयोग का एक केंद्रीय स्तंभ बताया और कहा कि रूस परमाणु क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करता है। उन्होंने तमिलनाडु की कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने भारत में एक नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण को लेकर जारी बातचीत और इस क्षेत्र में नए समझौतों की संभावना की ओर भी इशारा किया, जिसके लिए रूस पिछले दो वर्षों से प्रयास कर रहा था।
18वें ब्रिक्स सम्मेलन में 11 सदस्य देश और 10 पार्टनर देश होंगे शामिल
भारत की अध्यक्षता में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। दो दशकों के सफर के बाद 11 सदस्यीय समूह बन चुके ब्रिक्स सम्मेलन की इस वर्ष की थीम “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” और मुख्य विजन “मानवता प्रथम” है। इस विशाल ब्लॉक में भारत, रूस, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और यूएई शामिल हैं। सम्मेलन में राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित कई वैश्विक नेता भाग लेंगे।
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