अयोध्या के राम जन्मभूमि चंदा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की नई विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने का सुझाव दिया है। अदालत ने यह टिप्पणी उस समय की, जब राज्य सरकार ने बताया कि शुरुआती जांच के लिए बनाई गई SIT अपना काम पूरा कर चुकी है और अब मामले की जांच पुलिस कर रही है।
सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई स्टेटस रिपोर्ट
इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 13 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। सोमवार को हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल कर दी गई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए अदालत को समय चाहिए और इस पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा।
कोर्ट ने नई SIT बनाने का दिया सुझाव
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि वर्तमान में मामले की जांच कौन कर रहा है। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि शुरुआती जांच SIT ने की थी। आरोपों की पुष्टि होने के बाद FIR दर्ज की गई और अब पुलिस आगे की जांच कर रही है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि पहले गठित SIT के अधिकारियों को मामले की पूरी जानकारी है। ऐसे में बेहतर होगा कि वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल करते हुए नई SIT बनाई जाए, जिसमें पहले जांच कर चुके अधिकारियों को भी शामिल किया जाए। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सरकार इस निर्देश का पालन करेगी।
27 जुलाई को आ सकता है अगला आदेश
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा कि मंदिर निर्माण के दौरान लोगों ने बड़ी मात्रा में धन और सोना-चांदी का दान दिया था, इसलिए उसका पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। एक अन्य वकील ने एफआईआर की प्रति सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सभी पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद 27 जुलाई को आवश्यक आदेश जारी करेगा।
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