ईरान और भारत के बीच कूटनीतिक और आर्थिक रिश्ते एक नए और महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गए हैं। लगातार आठ महीनों से चल रहे भयंकर युद्ध और भारी वैश्विक दबाव के बावजूद भारत ने इस पूरे संघर्ष में एक निष्पक्ष और तटस्थ रुख बनाए रखा है। नई दिल्ली की ओर से ईरान को लेकर किसी भी तरह की नकारात्मक बयानबाजी नहीं की गई है। इस परिप्रेक्ष्य में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगेई ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि उनका देश भारत के साथ अपने ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है।
बिश्केक में पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात से बदला माहौल
दोनों देशों के बीच यह सकारात्मक बयान हाल ही में किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन के दौरान हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद आया है। बिश्केक में 31 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाकात हुई थी। दोनों शीर्ष नेताओं की इस बातचीत ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक, रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को एक नई दिशा दी है।
नई दिल्ली में होने जा रहे 18वें ब्रिक्स सम्मेलन पर टिकी नजरें
भारत की अध्यक्षता में 11 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। ब्रिक्स का स्थायी सदस्य होने के नाते ईरान का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इसमें भाग लेने भारत आ रहा है। ईरानी प्रवक्ता बगेई के अनुसार, ईरान इस सम्मेलन को भारत के साथ आपसी हित के विभिन्न मुद्दों, व्यापार और आर्थिक सहयोग पर बातचीत आगे बढ़ाने के बेहतरीन अवसर के रूप में देख रहा है। हालांकि, अमेरिका द्वारा ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने की चेतावनियों के बीच यह वार्ता काफी साहसिक मानी जा रही है।
चाबहार बंदरगाह से बढ़ेगी पाकिस्तान और चीन की चिंताएं
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह परियोजना सबसे मुख्य एजेंडा रहने वाला है। चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद खास है, क्योंकि इसके माध्यम से भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा समुद्री मार्ग मिलता है। भारत इस प्रोजेक्ट में भारी निवेश कर चुका है। चाबहार में भारत की सक्रियता को चीन और पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के जवाब के तौर पर देखा जाता है, जो वर्तमान में बलूचिस्तान और पीओके में जारी भारी अशांति के कारण अधर में लटका हुआ है। चाबहार पर भारत-ईरान की प्रगति से इस्लामाबाद और बीजिंग दोनों की बेचैनी बढ़ गई है।
अमेरिकी चेतावनी और ट्रंप प्रशासन के कड़े रुख का भारत पर असर
भारत और ईरान की नजदीकियों पर अमेरिका कड़ी नजर रखे हुए है। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात किसी नए व्यापारिक समझौते के लिए नहीं थी। रुबियो ने स्पष्ट किया कि यद्यपि हर देश को स्वतंत्र विदेश नीति का अधिकार है, लेकिन किसी को भी अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में ईरान की मदद नहीं करनी चाहिए। रूस से रियायती तेल खरीदने पर पहले भी अमेरिकी शुल्क का सामना कर चुके भारत के लिए ईरान से बढ़ते व्यापार के बीच नए अमेरिकी टैरिफ का खतरा बना हुआ है, लेकिन भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता पर कायम है।
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