उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए शुद्धीकरण कार्यक्रम को लेकर चल रहे विवाद में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाया। साथ ही अदालत ने पुलिस की ओर से की जा रही जांच पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
शुद्धीकरण को लेकर विवाद
मल्लिकार्जुन खड़गे ने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में ‘विजय शंखनाद रैली’ की थी। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मैदान में शुद्धीकरण यज्ञ कराया गया। इस घटना को लेकर खड़गे सहित कांग्रेस के कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए और मामले की जांच की मांग की। विवाद बढ़ने के बाद स्वतंत्र जांच को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री सामने नहीं रखी गई। हाई कोर्ट ने मौजूदा पुलिस जांच में हस्तक्षेप करना भी सही नहीं माना।
मामले को लेकर दोनों पक्षों का प्रदर्शन
हाई कोर्ट के फैसले से पहले शुद्धीकरण के मुद्दे पर उत्तराखंड में कांग्रेस ने अलग-अलग प्रदर्शन किए थे। शुद्धीकरण कार्यक्रम के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के विरोध से जुड़ी थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कांग्रेस महासचिव और प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा भी मौजूद थीं। पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। कुछ नेताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें एहतियातन हिरासत में लिया और बाद में छोड़ दिया।
इसी मुद्दे पर बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा ने प्रदेश के सभी जिलों में धरना दिया। देहरादून के गांधी पार्क में ‘सामाजिक सौहार्द संकल्प धरना’ आयोजित किया गया। बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर मामले को लेकर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। इस बीच हाई कोर्ट के फैसले के बाद फिलहाल मामले की जांच पुलिस के स्तर पर ही जारी रहेगी। अदालत ने स्वतंत्र जांच की मांग स्वीकार नहीं की है।
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