Jammu Security: जम्मू संभाग के घने जंगलों वाले इलाकों में बढ़ती आतंकी गतिविधियों के बीच सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। कठुआ-उधमपुर रेंज के 21 संवेदनशील और प्रमुख स्थानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अब सेना की जगह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) को सौंप दी गई है। इसके साथ ही जंगलों और दुर्गम इलाकों में अभियानों की क्षमता बढ़ाने के लिए कोबरा की नौ विशेष टीमें भी तैनात की जाएंगी।
कठुआ-उधमपुर में आतंकियों से चुनौती
कठुआ और उधमपुर के पहाड़ी और घने जंगलों से घिरे इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में आतंकी गतिविधियां सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। उधमपुर के डुडू-बसंतगढ़ से लेकर कठुआ के बिलावर और मच्छेड़ी सेक्टर तक हाल के दिनों में कई मुठभेड़ हुई हैं। इनमें आतंकी मारे भी गए हैं, लेकिन दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अभियान चलाना लगातार चुनौतीपूर्ण रहा है।
सेना को मिलेगी अहम अभियानों पर ज्यादा जिम्मेदारी
इस बदलाव का उद्देश्य सुरक्षा बलों की भूमिका को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाना है। CRPF अब स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अहम प्रतिष्ठानों की निगरानी और नियमित सुरक्षा जांच जैसे कार्य संभालेगी। इससे सेना को स्थानीय सुरक्षा दायित्वों से राहत मिलेगी और वह सीमा सुरक्षा, नियंत्रण रेखा की निगरानी और आतंकवाद विरोधी अभियानों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सकेगी।
CRPF जवानों को दी गई विशेष ट्रेनिंग
CRPF को यह जिम्मेदारी अचानक नहीं मिली है। इस दिशा में लंबे समय से एरिया ऑफ रिस्पांसिबिलिटी के तहत काम चल रहा था। चार-पांच वर्ष पहले राष्ट्रीय राइफल की मारक क्षमता में CRPF को शामिल करने पर विचार किया गया था। इसके लिए रक्षा विशेषज्ञों, सेना, CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की राय ली गई थी। इसके बाद प्रस्ताव पर आगे बढ़ते हुए CRPF को सेना के ऑपरेशन पैटर्न पर काम करने की रणनीति को मंजूरी दी गई।
सेना, IB और पुलिस के अधिकारियों ने दिया प्रशिक्षण
पिछले साल बल मुख्यालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया था कि ऐसे कार्मिक, जिनका तबादला, उक्त बटालियनों में हुआ है, उन्हें संबंधित यूनिटों से बिना किसी देरी के रिलीव कर दिया जाए। लंबे समय से आतंकियों के खिलाफ अभियानों में शामिल रहे आर्मी, आईबी एवं पुलिस के अधिकारियों ने CRPF की उक्त बटालियनों के जवानों और अफसरों को प्री-इंडक्शन ट्रेनिंग दी है। चयनित जवानों और अधिकारियों को सेना, खुफिया ब्यूरो और पुलिस के अनुभवी अधिकारियों से भी विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया।
तीन CRPF बटालियन संभालेंगी जिम्मेदारी
सेना के नियंत्रण वाले 21 संवेदनशील स्थानों की जिम्मेदारी CRPF की 24वीं, 121वीं और 187वीं बटालियनों को सौंपी गई है। इन बटालियनों में आतंकवाद रोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित जवान और अधिकारी शामिल हैं।
सुरक्षा जिम्मेदारियों के बंटवारे पर लंबे समय से मंथन
बदलाव पर लंबे समय से मंथन चल रहा था। यह प्रभावी कदम है। सेना का काम अंदरूनी सुरक्षा संभालना नहीं है। जब देश का लक्ष्य गुलाम कश्मीर को वापस लाने जैसा बड़ा है तो सेना को काउंटर इंटेलिजेंस जैसे कामों में लंबे समय तक लगाए रखना उचित नहीं होगा। पिछले काफी समय से सेना पुलिस और सीआरपीएफ को प्रशिक्षण दे रही है और उन्हें हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है। जिम्मेदारी के इस बंटवारे से सेना अपने बड़े लक्ष्य पर ज्यादा प्रभावी तरीके से काम कर सकेगी।
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