Diwali 2026: दीपावली का त्योहार आते ही देशभर में घरों को दीयों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है। भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में लोग पूजा-पाठ करते हैं और आतिशबाजी के साथ इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में एक ऐसा गांव भी है, जहां दिवाली का दिन खुशियों के बजाय शोक का प्रतीक माना जाता है। यहां ग्रामीण सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार इस दिन न तो घरों में दीपक जलाते हैं और न ही दीपावली का उत्सव मनाते हैं।
मिर्जापुर के अटारी गांव में दिवाली पर पसरा रहता है सन्नाटा
मिर्जापुर जिले की मड़िहान तहसील के अटारी गांव में दीपावली मनाने की परंपरा दूसरे गांवों से बिल्कुल अलग है। चौहान बाहुल्य इस गांव में दिवाली के दिन लोग उत्सव मनाने के बजाय शोक दिवस के रूप में समय बिताते हैं। बताया जाता है कि आसपास के करीब आधा दर्जन गांवों में भी चौहान समुदाय के लोग इसी परंपरा का पालन करते हैं। दिवाली के दिन ग्रामीण एक जगह इकट्ठा होते हैं और अपने पूर्वज माने जाने वाले पृथ्वीराज चौहान को याद करते हैं।
पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु से जुड़ी है मान्यता
गांव के लोगों के मुताबिक, वे खुद को हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान का वंशज मानते हैं। ग्रामीणों की मान्यता है कि दीपावली के दिन ही मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान की हत्या की थी। इसी वजह से उनके लिए यह दिन उत्सव का नहीं, बल्कि दुख और शोक का दिन है। यही कारण है कि इस दिन गांव के लोग अपने घरों में दीपक नहीं जलाते और दिवाली की खुशियां नहीं मनाते। हालांकि, यह गांव की पारंपरिक मान्यता है।
एकादशी के दिन मनाते हैं दीपावली का त्योहार
अटारी गांव के रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि, उनके पूर्वज दीपावली के दिन त्योहार नहीं मनाते थे। वे इस दिन को पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु से जोड़कर शोक दिवस के रूप में मनाते आए हैं। परिवार की पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज की पीढ़ी भी इसका पालन कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाली पीढ़ियां भी इस परंपरा को जारी रखेंगी। हालांकि, गांव के लोग एकादशी के दिन दीपावली का पर्व बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाते हैं।
बचपन से देख रही हैं इस परंपरा का पालन
गांव की एक महिला ने बताया कि उन्होंने बचपन से ही अपने घर और गांव में दीपावली के दिन उत्सव मनाते नहीं देखा है। परिवार के बड़े-बुजुर्ग जिस परंपरा का पालन करते आए हैं, उसी को वे भी आगे बढ़ा रही हैं। उनका कहना है कि आने वाली पीढ़ी भी इस परंपरा को निभाएगी। इस तरह देशभर में रोशनी और खुशियों का प्रतीक मानी जाने वाली दीपावली अटारी गांव के लोगों के लिए शोक का दिन है। यहां के ग्रामीण एकादशी को दीप जलाकर त्योहार मनाते हैं और अपनी पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए हैं।
Read More:
CM धामी ने 37वें अखिल भारतीय खेलकूद समारोह के विजेताओं को किया सम्मानित

