RBI Governor Sanjay Malhotra: भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव का असर सिर्फ शेयर बाजार और बड़े कारोबारियों पर नहीं पड़ता, बल्कि इससे कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरी जरूरी चीजों का आयात महंगा हो सकता है। इसका सीधा असर देश के आयात बिल और महंगाई पर भी पड़ता है। इसी वजह से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की चाल को व्यवस्थित रखने और जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी रोकने के लिए कदम उठा रहा है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मनीकंट्रोल को दिए एक खास इंटरव्यू में कहा है कि जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक आगे भी कार्रवाई कर सकता है।
नियमों में क्यों किया गया बदलाव
आरबीआई ने विदेशी मुद्रा से जुड़े कुछ नियम हाल में सख्त किए हैं। अब रद्द किए गए फॉरेन करेंसी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को दोबारा बुक करने पर रोक लगा दी गई है। कुछ विदेशी मुद्रा सौदों के लिए रिजर्व रखने से जुड़े नियम भी बदले गए हैं। इसके साथ ही दस्तावेजों की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है और संबंधित सीमा को 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दिया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य ऐसे सौदों पर लगाम लगाना है, जिनका आधार वास्तविक कारोबारी जरूरत के बजाय कीमतों में उतार-चढ़ाव से मुनाफा कमाना हो।
एक दिन में रद्द हो रहे थे सौदे
संजय मल्होत्रा के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में आरबीआई ने पाया कि बड़ी संख्या में विदेशी मुद्रा से जुड़े सौदे उसी दिन रद्द करके दोबारा बुक किए जा रहे थे। कुछ मामलों में करीब एक-तिहाई सौदे उसी दिन बंद या रद्द हो रहे थे, जिस दिन उन्हें किया गया था। उनके मुताबिक, अगर किसी कंपनी को आयात भुगतान के लिए डॉलर चाहिए तो वह सामान्य तौर पर उस जरूरत से जुड़ा सौदा कुछ समय तक बनाए रखेगी। बार-बार सौदा रद्द करना और फिर बुक करना सट्टेबाजी का संकेत हो सकता है।
हर सौदे को सट्टेबाजी नहीं मानता RBI
गवर्नर ने स्पष्ट किया कि हर ऐसा सौदा सट्टेबाजी नहीं होता। आरबीआई का वास्तविक उद्देश्य जरूरत से ज्यादा और एकतरफा दांव को कम करना है, ताकि विदेशी मुद्रा बाजार में वास्तविक कारोबारी जरूरतों के अनुरूप गतिविधियां बनी रहें।
विदेशी निवेशकों पर नहीं लगेगा कैपिटल कंट्रोल
संजय मल्होत्रा ने साफ किया कि हाल के कदमों को कैपिटल कंट्रोल के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। विदेशी निवेशकों के भारत में पैसा लगाने या निवेश से रकम निकालने पर सामान्य रोक लगाने का उद्देश्य नहीं है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय शेयरों और बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं और जरूरत के मुताबिक रकम वापस भी ले सकते हैं।
निवेश से जुड़े जोखिम की हेजिंग जारी रहेगी
विदेशी निवेशक और नॉन-रेसिडेंट अपने निवेश से जुड़े जोखिम से बचाव के लिए हेजिंग कर सकते हैं। हेजिंग का मतलब भविष्य में कीमतों में बदलाव से होने वाले संभावित नुकसान को कम करने की व्यवस्था है। आरबीआई का कहना है कि नए नियम विदेशी पूंजी के आने-जाने पर रोक लगाने के लिए नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार को व्यवस्थित रखने के लिए हैं।
किसी खास स्तर पर रुपये को रोकना लक्ष्य नहीं
सोमवार को रुपये में मजबूती देखी गई, लेकिन गवर्नर ने कहा कि आरबीआई रुपये को किसी निश्चित कीमत या तय दायरे में रखने का लक्ष्य नहीं रखता। केंद्रीय बैंक की कोशिश अचानक और जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव को रोकने तथा सट्टेबाजी के कारण बाजार की सामान्य चाल को प्रभावित होने से बचाने की है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर RBI को भरोसा
मल्होत्रा के मुताबिक, विदेशी मुद्रा बाजार भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर जरूरत से ज्यादा निराशावादी नजर आ रहा है। उन्होंने भारत की आर्थिक बुनियाद को मजबूत बताते हुए कहा कि सेवा निर्यात, विदेश में काम कर रहे भारतीयों से आने वाला पैसा और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। व्यापार समझौते, कारोबार आसान बनाने वाले सुधार, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने से निर्यात बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।
रुपये के लिए ब्याज दर बढ़ाने पर क्या बोले गवर्नर
रुपये पर दबाव आने की स्थिति में ब्याज दरें बढ़ाने के सवाल पर गवर्नर ने कहा कि मौद्रिक नीति का मुख्य उद्देश्य महंगाई को नियंत्रित करना है। वित्तीय स्थिरता के जोखिम से निपटने के लिए आरबीआई के पास नियामक और निगरानी से जुड़े दूसरे उपाय भी हैं। हालांकि ब्याज दरों और वित्तीय स्थिरता को पूरी तरह अलग नहीं किया जा सकता, क्योंकि दरों में बदलाव का असर बैंकों, कर्ज और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने यह नहीं कहा कि रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरें निश्चित रूप से बढ़ाई जाएंगी।
जरूरत पड़ी तो और कदम उठाएगा RBI
संजय मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई के पास बाजार में जरूरत के मुताबिक कदम उठाने के कई विकल्प हैं। हाल के कुछ फैसलों का शुरुआती असर सकारात्मक दिखा है। अगर सट्टेबाजी कम करने के लिए और कदम जरूरी हुए तो केंद्रीय बैंक उन पर विचार करेगा। उन्होंने घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत बताते हुए कहा कि बैंक अच्छी स्थिति में हैं, कंपनियों की कमाई में सुधार के संकेत हैं और घरेलू विकास भी मजबूत बना हुआ है।
सरकार के साथ मिलकर भुगतान संतुलन मजबूत करने की तैयारी
गवर्नर ने कहा कि सरकार और आरबीआई मिलकर देश की भुगतान संतुलन स्थिति मजबूत करने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे। उनका संदेश स्पष्ट है कि रुपये की किसी खास कीमत को तय करना लक्ष्य नहीं है। प्राथमिकता बाजार को व्यवस्थित रखने, अचानक उतार-चढ़ाव कम करने और जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी पर रोक लगाने की है। बदलते वैश्विक हालात और विदेशी मुद्रा बाजार की चुनौतियों पर नजर रखते हुए जरूरत पड़ने पर आरबीआई आगे भी कार्रवाई कर सकता है।
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