Why Dhanteras is Called Dhantrayodashi: पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। इसके अलावा लोग सोना, चांदी, बर्तन और दूसरी नई चीजें खरीदते हैं। धार्मिक मान्यताओं में धनतेरस को धन, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना गया है। इसे धन त्रयोदशी भी कहा जाता है। लेकिन आखिर धनतेरस का नाम धन त्रयोदशी क्यों पड़ा? इसके पीछे इसकी तिथि और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।
कार्तिक की त्रयोदशी तिथि से जुड़ा है नाम
धनतेरस का पूरा नाम धन त्रयोदशी है। यह नाम दो शब्दों ‘धन’ और ‘त्रयोदशी’ से मिलकर बना है। हिंदू पंचांग के अनुसार, धनतेरस कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। त्रयोदशी का अर्थ चंद्र पक्ष का तेरहवां दिन होता है। इसी तिथि के कारण इसके नाम में ‘त्रयोदशी’ शब्द जुड़ा है।
धन शब्द क्यों जुड़ा?
धनतेरस के नाम में ‘धन’ शब्द के पीछे भी धार्मिक मान्यता है। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार, मां लक्ष्मी की पूजा से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की कामना की जाती है। वहीं भगवान कुबेर को धन और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इस तरह ‘धन’ और ‘त्रयोदशी’ शब्दों के मेल से इसका नाम धन त्रयोदशी पड़ा, जिसे आम बोलचाल में धनतेरस कहा जाता है।
भगवान धन्वंतरि की पूजा का भी है खास महत्व
धनतेरस केवल धन-संपत्ति का पर्व नहीं है, बल्कि इसे स्वास्थ्य और लंबी आयु से भी जोड़कर देखा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें सेहत और आयुर्वेद का देवता माना जाता है। यही कारण है कि धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से परिवार के सदस्यों को अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है।
सोना-चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा
धनतेरस पर नई वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन लोग अपनी जरूरत और बजट के अनुसार सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, बर्तन और अन्य चीजें खरीदते हैं। धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में इसे घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है।
धन के साथ सेहत और खुशियों का संदेश
धनतेरस का महत्व केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है। यह पर्व धन-संपत्ति के साथ अच्छी सेहत, परिवार की खुशियों और सुख-समृद्धि की कामना का भी संदेश देता है। इसलिए इस दिन लोग मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं और अपने परिवार के लिए समृद्धि, सुख और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं।
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