West Asia Crisis: पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान के IRGC ने दावा किया है कि उसने कुवैत में मौजूद अमेरिका संचालित ‘अली अल सालेम’ एयरबेस पर बड़ा हमला कर दो ड्रोन हैंगर और विमानों के ईंधन डिपो को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, इस कार्रवाई के साथ कुवैत के नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा गया कि ‘जब तक अमेरिकी ‘काबिज और लुटेरी सेना’ को इस क्षेत्र से बेदखल नहीं कर दिया जाता, तेहरान की सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।’
अमेरिका ने दावों को किया खारिज
IRGC के दावों को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में CENTCOM ने कहा कि हाल ही में हुए किसी भी ईरानी हमले में अमेरिकी विमानों या सैन्य संपत्तियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरान की ओर से दागी गई सभी मिसाइलों और ड्रोन को या तो बीच हवा में मार गिराया गया या वे अपने निशाने तक पहुंचने में पूरी तरह नाकाम रहे। CENTCOM ने यह भी कहा कि क्षेत्र में 20 से अधिक अमेरिकी युद्धपोत, सैकड़ों विमान और हजारों सैनिक पूरी तरह मुस्तैद हैं।
F-35 लड़ाकू विमानों को लेकर भी आमने-सामने
इससे पहले भी ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य कार्रवाई को लेकर दावों का टकराव सामने आ चुका है। तेहरान ने दावा किया था कि उसने जोर्डन के अल-अजराक एयरबेस पर मिसाइल हमला कर अमेरिका के तीन F-35 फाइटर जेट्स को पूरी तरह खत्म कर दिया, जबकि तीन दूसरे विमानों को भारी नुकसान पहुंचा। ईरान के अनुसार, यह हमला द्वीप समूह केशम पर अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में किया गया था। हालांकि, पेंटागन और जोर्डन की सेना ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि सभी मिसाइलों को समय रहते इंटरसेप्ट कर लिया गया था और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच जारी हवाई और नौसैनिक टकराव के बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा बंद कर दिया है। इस कदम से मध्य पूर्व से होने वाली तेल और गैस की समुद्री आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। इसी दौरान मिस्र के गैस आयात केंद्र और कुवैत में एक चीनी कंपनी के ठिकाने पर भी हमलों की खबरें सामने आई हैं।
दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
ईरान और अमेरिका दोनों की ओर से एक-दूसरे के दावों का लगातार खंडन किया जा रहा है। फिलहाल कुवैत के ‘अली अल सालेम’ एयरबेस पर नुकसान या F-35 लड़ाकू विमानों के तबाह होने के दावों की किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में दोनों देशों के आधिकारिक बयानों के बीच सच्चाई स्पष्ट होना अभी बाकी है।
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