नॉर्थ कोरिया ने एक बार फिर मिसाइल परीक्षण कर कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ा दिया है। साउथ कोरिया के संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ ने 4 नवंबर 2026 को बताया कि नॉर्थ कोरिया ने अपने पूर्वी तट से जापान सागर (पूर्वी सागर) की दिशा में कई प्रोजेक्टाइल या मिसाइलें दागीं। ये प्रक्षेपण दक्षिण हम्ग्योंग प्रांत के सोनडोक इलाके से सुबह के समय किए गए।
साउथ कोरिया और अमेरिका की सैन्य टीमें इन मिसाइलों के प्रकार, उनकी मारक दूरी और अन्य तकनीकी पहलुओं का विश्लेषण कर रही हैं। शुरुआती जानकारी में मिसाइलों की सटीक श्रेणी स्पष्ट नहीं हो पाई है। वहीं, जापान की ओर से इस घटना पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
एक हफ्ते में चौथी सैन्य गतिविधि
यह प्रक्षेपण नॉर्थ कोरिया की हालिया सैन्य गतिविधियों की चौथी बड़ी घटना बताई जा रही है। पिछले एक सप्ताह के दौरान प्योंगयांग ने 600 मिलीमीटर रॉकेट सिस्टम, क्लस्टर वॉरहेड वाले बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के परीक्षण किए थे। इससे पहले हाइपरसोनिक मिसाइलों समेत कई अन्य हथियारों का भी परीक्षण किया जा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि नॉर्थ कोरिया लगातार अपनी मिसाइल तकनीक को बेहतर बनाने में जुटा है। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर हथियारों के उत्पादन की तैयारी भी की जा सकती है। किम जोंग उन की बहन किम यो-जोंग ने हाल ही में अमेरिका के साथ बातचीत की संभावना से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि जब तक अमेरिका अपनी शत्रुतापूर्ण नीति नहीं छोड़ता, तब तक संवाद संभव नहीं है।
अमेरिका और साउथ कोरिया ने बढ़ाई निगरानी
मिसाइल परीक्षण के बाद साउथ कोरियाई सेना ने कहा है कि वह अमेरिका के साथ मजबूत संयुक्त रक्षा व्यवस्था बनाए हुए है और किसी भी उकसावे का जवाब देने के लिए तैयार है। जापान सागर की ओर दागी गई मिसाइलें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गिरती हैं, फिर भी ऐसे परीक्षण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों का उल्लंघन माने जाते हैं। साउथ कोरिया, जापान और अमेरिका क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे हैं। हाल के सीमा संबंधी घटनाक्रमों के कारण दोनों कोरियाई देशों के बीच अविश्वास भी बढ़ा है। तनाव का असर समुद्री यातायात, मछली पालन और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ने की आशंका है।
सैन्य ताकत के साथ कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश
विशेषज्ञों के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया के लगातार मिसाइल परीक्षणों का उद्देश्य अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाना भी हो सकता है। किम जोंग उन हाल ही में नौसेना के नए विध्वंसक जहाज का निरीक्षण कर शक्तिशाली नौसैनिक बल विकसित करने पर जोर दे चुके हैं। विश्लेषकों का मानना है कि लगातार परीक्षणों के जरिए प्योंगयांग अपनी मिसाइल तकनीक को और परिपक्व बना रहा है। साउथ कोरिया और अमेरिका इस ताजा प्रक्षेपण से जुड़े तकनीकी आंकड़ों का विश्लेषण जारी रखेंगे। फिलहाल क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है और तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
Read More

