अमरोहा(Amroha) की 65 वर्षीय शकुंतला देवी के लिए बेटे ओमकार की मौत जिंदगी का सबसे बड़ा सदमा थी। 21 अक्टूबर 2022 की रात ओमकार की गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। बेटे की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा लेकिन शकुंतला देवी ने हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्होंने तय किया कि जब तक बेटे की मौत के जिम्मेदार लोगों को अदालत से सजा नहीं मिल जाती वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।
इसके बाद शुरू हुआ करीब चार साल लंबा कानूनी संघर्ष। शकुंतला देवी इस दौरान अदालत की करीब 60 तारीखों पर पहुंचीं। उम्र और परिस्थितियों की परवाह किए बिना वह हर सुनवाई में मौजूद रहीं और मामले में अपनी गवाही पर कायम रहीं।
पत्नी और उसके प्रेमी को उम्रकैद
मामले में अदालत ने 3 अक्टूबर को ओमकार की पत्नी नीतू और आरिफ को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। फैसला सुनाए जाने के बाद शकुंतला देवी भावुक हो गईं। उनका कहना था कि बेटा वापस नहीं आ सकता, लेकिन अब उसे न्याय मिलने से उसकी आत्मा को शांति जरूर मिलेगी।
मां की गवाही बनी अहम कड़ी
मामले के अनुसार, घटना वाली रात शकुंतला देवी ने बेटे के कमरे से चीख की आवाज सुनी थी। वह तुरंत वहां पहुंचीं जहां उन्होंने एक व्यक्ति को भागते हुए देखा और ओमकार की पत्नी नीतू को कमरे में पाया। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
बताया गया कि आरोपियों की ओर से घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई थी। हालांकि पुलिस की जांच और शकुंतला देवी की गवाही के आधार पर मामला आगे बढ़ा। अदालत के फैसले के बाद चार साल से चल रही उनकी कानूनी लड़ाई का अंत हुआ और उन्हें अपने बेटे के मामले में न्याय मिला।