दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोट जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन और संसद मार्च के बाद दिल्ली पुलिस(Delhi Police) ने अपनी जांच का दायरा डिजिटल प्लेटफॉर्म तक बढ़ा दिया है। अब केवल प्रदर्शन में मौजूद लोगों की ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो, पोस्ट, लाइव स्ट्रीम और अन्य ऑनलाइन सामग्री की भी बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इंटरनेट के माध्यम से भ्रामक या आपत्तिजनक जानकारी तो नहीं फैलाई गई।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां उन यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स की गतिविधियों का भी अध्ययन कर रही हैं जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान या उसके बाद लगातार वीडियो और पोस्ट साझा किए। जांच का उद्देश्य यह समझना है कि साझा किए गए कंटेंट में किए गए दावे कितने तथ्यात्मक थे और कहीं वीडियो को एडिट या संदर्भ से अलग दिखाकर गलत संदेश तो नहीं फैलाया गया।
कंटेंट क्रिएटर्स की भूमिका की हो रही पड़ताल
दिल्ली में हुए CJP प्रदर्शन के बाद जांच एजेंसियों ने अपनी जांच का दायरा सोशल मीडिया तक बढ़ा दिया है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान किन यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और अन्य डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने मौके से वीडियो रिकॉर्ड किए और उन्हें किस तरह सोशल मीडिया पर शेयर किया। जांच का उद्देश्य यह समझना है कि पोस्ट किए गए वीडियो और दावों में कितनी तथ्यात्मक जानकारी थी और कहीं किसी सामग्री को इस तरह प्रस्तुत तो नहीं किया गया जिससे कानून-व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता था।
वीडियो की असलियत की हो रही जांच
जांच एजेंसियां हर उस वीडियो और क्लिप की जांच कर रही हैं जो प्रदर्शन से जुड़ी बताई जा रही है। अधिकारी यह मिलान कर रहे हैं कि वायरल वीडियो का मूल फुटेज क्या था और क्या उसे सोशल मीडिया पर साझा करने से पहले किसी तरह एडिट, कट या संदर्भ से अलग करके पेश किया गया। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कहीं किसी वीडियो के जरिए घटनाओं की गलत तस्वीर तो पेश नहीं की गई।
सूत्रों के मुताबिक, CJP के शुरुआती प्रदर्शनों के दौरान भी बड़ी संख्या में यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स मौजूद थे। बताया जा रहा है कि कई कंटेंट क्रिएटर्स अपने-अपने प्लेटफॉर्म के लिए वीडियो और अन्य सामग्री तैयार करने के उद्देश्य से प्रदर्शन स्थल पहुंचे थे। अब जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि उनकी ओर से शेयर किए गए पोस्ट का पूरे घटनाक्रम पर क्या असर पड़ा।
180 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट जांच में शामिल
पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियों की समीक्षा करते हुए करीब 180 से अधिक सोशल मीडिया हैंडल को जांच के दायरे में लिया है। इनमें ऐसे अकाउंट शामिल बताए जा रहे हैं जिनसे प्रदर्शन के दौरान या उसके बाद कथित रूप से भ्रामक, आपत्तिजनक या गलत जानकारी साझा की गई थी। इन सभी अकाउंट्स की गतिविधियों और साझा किए गए कंटेंट की जांच की जा रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भेजे गए नोटिस
दिल्ली पुलिस ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (X) और यूट्यूब जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर कथित रूप से फर्जी, भ्रामक और आपत्तिजनक पोस्ट तथा वीडियो हटाने का अनुरोध किया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद बड़ी मात्रा में ऐसे वीडियो और पोस्ट सामने आए जिनमें कथित तौर पर छेड़छाड़ या भ्रामक जानकारी शामिल थी।
इसी वजह से संबंधित प्लेटफॉर्म्स से आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी डिजिटल साक्ष्यों की विस्तार से पड़ताल कर रही है।