S Jaishankar on India-China Relations: भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार के संकेतों के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत का रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिए केवल बातचीत पर्याप्त नहीं है, बल्कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है। जयशंकर ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बातचीत के दौरान कहा कि भारत के लिए सीमा पर शांतिपूर्ण और स्थिर स्थिति दोनों देशों के रिश्तों की बुनियादी शर्त है।
चीन को भारत का साफ संदेश
जयशंकर के बयान से साफ है कि भारत चीन के साथ संबंध सुधारने के लिए आगे बढ़ने को तैयार है, लेकिन सीमा पर तनाव की स्थिति में रिश्तों को पूरी तरह सामान्य करना संभव नहीं होगा। भारत का मानना है कि सीमा पर शांति केवल सैन्य जरूरत नहीं, बल्कि दोनों देशों के भविष्य के संबंधों की आधारशिला भी है। व्यापार और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं के बावजूद सीमा विवाद का असर व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ता है।
2020 के बाद बिगड़े थे रिश्ते
भारत और चीन के संबंधों में सबसे बड़ा तनाव 2020 में सीमा पर हुई हिंसक झड़पों के बाद आया था। गलवान घाटी समेत सीमा से जुड़े मामलों ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से बनी शांति व्यवस्था को प्रभावित किया। यह 1975 के बाद सीमा पर शांति की स्थिति से बड़ा विचलन माना गया। इसके बाद दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक भरोसा कमजोर हुआ और संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया कठिन हो गई।
चार साल से ज्यादा चली बातचीत
2020 के तनाव के बाद सीमा पर स्थिति सुधारने के लिए भारत और चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। सैन्य कमांडरों और राजनयिक अधिकारियों के बीच हुई चर्चाओं का उद्देश्य सीमा पर टकराव कम करना और स्थिरता बहाल करना था। इस प्रक्रिया में चार साल से ज्यादा समय लगा। भारत की कोशिश रही कि सीमा पर तनाव कम हो और दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने की परिस्थितियां बनें।
2024 से हालात में सुधार
जयशंकर के मुताबिक, 2024 से भारत-चीन सीमा पर स्थिति में काफी सुधार हुआ है। सीमा क्षेत्रों में हालात स्थिर होने के साथ दोनों देशों के संबंध भी सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़े हैं। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि पुराने मतभेद पूरी तरह खत्म हो गए हैं। भारत चाहता है कि सीमा पर बनी स्थिरता आगे भी कायम रहे, ताकि दोनों देश अन्य क्षेत्रों में संबंधों को आगे बढ़ा सकें।
सीमा पर तनाव से रिश्तों पर असर
भारत का रुख है कि सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंध एक-दूसरे से सीधे जुड़े हैं। अगर सीमा पर तनाव बढ़ता है तो इसका असर राजनीतिक, कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों पर भी पड़ता है। इसलिए भारत चीन से जिम्मेदार व्यवहार और सीमा पर स्थिरता बनाए रखने की उम्मीद कर रहा है। नई परिस्थितियों में भरोसा कायम रखना दोनों देशों के लिए अहम माना जा रहा है।
आगे चीन के रिएक्शन पर नजर
जयशंकर के बयान के बाद अब निगाहें चीन के अगले कदम पर हैं। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि सामान्य द्विपक्षीय संबंधों की राह सीमा पर शांति और स्थिरता से होकर गुजरती है। दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं बनी हुई हैं, लेकिन भारत सीमा पर शांति के मुद्दे पर समझौता करने के पक्ष में नहीं है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि चीन इस संदेश पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है और सीमा पर मौजूदा स्थिरता को कैसे बनाए रखा जाता है।
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