HIV Outbreak in Pakistan: पाकिस्तान में HIV संक्रमण के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कराची में HIV के 130 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें 70 से अधिक बच्चे शामिल हैं। इससे पहले पंजाब प्रांत के तौंसा शहर में भी 331 बच्चों के HIV संक्रमित होने का मामला सामने आ चुका है। ऐसे समय में जब देश पहले से बढ़ती गरीबी का सामना कर रहा है और हालिया रिपोर्ट के मुताबिक हर 10 में से 3 लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन बिता रहे हैं और पिछले 6 वर्षों में गरीबी बढ़कर 28.9% तक पहुंच गई है, यह स्वास्थ्य संकट और अधिक गंभीर माना जा रहा है।
स्क्रीनिंग में खुली अस्पताल की लापरवाही
पिछले सप्ताह सिंध के श्रम मंत्री सईद गनी ने बताया कि कुलसुम वाई बालिका अस्पताल और उसके आसपास 10,500 लोगों की HIV स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 130 संक्रमित मिले। जांच में सामने आया कि अस्पताल में संक्रमण रोकथाम से जुड़े सुरक्षा का पालन नहीं किया जा रहा था। अस्पताल प्रशासन यह भी साफ नहीं कर सका कि एक बार इस्तेमाल होने वाली सीरिंज का निस्तारण किस प्रकार किया जाता है।
अक्टूबर से सामने आ रहे हैं लगातार मामले
पाकिस्तान में HIV संक्रमण का यह प्रकोप पहली बार पिछले वर्ष अक्टूबर के आखिर में चर्चा में आया था। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि केवीबी अस्पताल में इलाज करा चुके कई बच्चे HIV संक्रमित पाए गए। इसके बाद जांच शुरू की गई। बीती 14 जुलाई को सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने जांच में सामने आई गंभीर कमियों को स्वीकार किया। रिपोर्ट में कहा गया कि अस्पताल में HIV संक्रमण रोकथाम के नियमों का पालन नहीं हो रहा था और सीरिंजों के निपटान में भी भारी लापरवाही बरती गई। यह खामियां सिंध हेल्थकेयर कमीशन की टीम के निरीक्षण के दौरान सामने आईं।
एक ही सुई का बार-बार इस्तेमाल बना संक्रमण की वजह
जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल में 45 पाकिस्तानी रुपये की सीरिंज बचाने के लिए एक ही सुई का बार-बार इस्तेमाल किया गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल कर्मी यह भी नहीं बता सके कि इस्तेमाल की गई सुइयों का सुरक्षित निस्तारण कैसे किया जाता है। इसके अलावा संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण से जुड़ा औपचारिक प्रशिक्षण भी कर्मचारियों को नहीं दिया गया था। अस्पताल में ऑटोक्लेव यानी चिकित्सा उपकरणों को संक्रमणमुक्त करने वाली मशीन की उपलब्धता भी स्पष्ट नहीं हो सकी। मेडिकल वेस्ट के निपटान में भी कई गंभीर खामियां मिलीं।
तौंसा में भी 331 बच्चे पाए गए थे संक्रमित
कराची से पहले पंजाब के तौंसा शहर में भी 331 बच्चों के HIV पॉजिटिव होने का मामला सामने आया था। जांच में पाया गया कि इन बच्चों को संक्रमण माता-पिता से नहीं मिला, क्योंकि जिन अभिभावकों की जांच हुई उनकी रिपोर्ट नेगेटिव थी। आरोप है कि यहां भी सरकारी अस्पताल में एक ही सुई का कई बच्चों पर इस्तेमाल किया गया, जिससे संक्रमण फैलता गया। ये मामले अक्टूबर 2024 से नवंबर 2025 के बीच के बताए गए हैं। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रकोप में 9 बच्चों की मौत भी हो चुकी है।
WHO और UNAIDS ने जताई गंभीर चिंता
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुमान के मुताबिक पाकिस्तान में करीब 3 लाख 50 हजार लोग HIV से संक्रमित हो सकते हैं। संगठन का कहना है कि लगभग 80 प्रतिशत संक्रमित लोगों को यह पता ही नहीं होता कि वे HIV की चपेट में हैं, खासकर बच्चों में यह स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है। WHO और UNAIDS पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि पाकिस्तान दुनिया में सबसे तेजी से फैलती HIV महामारी का सामना कर रहा है। पिछले 15 वर्षों में देश में HIV संक्रमण के मामलों में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। 2010 में जहां करीब 16 हजार मामले थे, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 48 हजार हो गई थी और नए मामलों के बाद इसमें और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
सरकार ने इलाज और कार्रवाई दोनों शुरू किए
बढ़ते मामलों के बाद पाकिस्तान सरकार ने सभी संक्रमित मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है। श्रम मंत्री सईद गनी के अनुसार, मरीजों का उपचार इंडस अस्पताल, आगा खान यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल और डॉव यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में कराया जाएगा। बच्चों के लिए निर्धारित 2 अरब पाकिस्तानी रुपये के बजट की निगरानी के लिए एक स्थायी समिति भी बनाई गई है। साथ ही 37 डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 14 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। सईद गनी का कहना है कि सामने आए सभी मामले पिछले साल अक्टूबर से पहले के हैं और हाल का कोई नया मामला नहीं है।
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