सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज का फर्जी रूप धरकर न्याय प्रणाली में हेरफेर करने की कोशिश करने वाले कथित महाठग सुकेश चंद्रशेखर को अदालत ने करारा झटका दिया है। दिल्ली की तीस हज़ारी अदालत ने एक अन्य आपराधिक मामले में ज़मानत की कार्यवाही को प्रभावित करने की साज़िश रचने के ज़ुर्म में सुकेश को आठ साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हर्षिता मिश्रा द्वारा 29 अगस्त को सुनाया गया था, जिसकी लिखित प्रति सोमवार को सार्वजनिक की गई।
अदालत ने किस धारा में दी कितनी सजा
अदालत ने सुकेश चंद्रशेखर को अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 170 के तहत आरोपी को दो साल के कठोर कारावास और 5,000 रुपये के जुर्माने की सजा दी गई है। इसके साथ ही, धारा 189 के तहत भी दो वर्ष की सख्त जेल और 5,000 रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है। वहीं, अदालत ने धारा 507 के अंतर्गत सुकेश को चार साल के कठोर कारावास की सजा से दंडित किया है।
सार्वजनिक संस्थानों से खिलवाड़ पर कोर्ट का सख्त रुख
सुनवाई के दौरान अदालत ने सार्वजनिक संस्थानों और आपराधिक न्याय व्यवस्था के सुचारू कामकाज में खलल डालने के प्रयासों पर बेहद कड़ा रुख अपनाया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि सजा ऐसी होनी चाहिए जिससे कानून व्यवस्था में जनता का विश्वास बना रहे। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि न्याय प्रणाली को किसी एक सामान्य गैर-कानूनी कृत्य और सार्वजनिक संस्थानों को डराने, प्रभावित करने या उनमें हेरफेर करने के इरादे से योजनाबद्ध तरीके से किए गए अपराधों के बीच का अंतर स्पष्ट करना होगा।
जज बनकर जमानत पाने का रचा था षड्यंत्र
सुकेश चंद्रशेखर पर आरोप था कि उसने भारत के सर्वोच्च न्यायालय के एक मौजूदा न्यायाधीश की झूठी पहचान बनाई। इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल उसने एक अन्य आपराधिक मुकदमे में चल रही ज़मानत याचिका की सुनवाई के दौरान कानूनी प्रक्रिया को अपने पक्ष में मोड़ने और प्रभावित करने के लिए किया था। हालांकि, अदालत ने इस धोखाधड़ी को पकड़ते हुए न्याय चक्र में हस्तक्षेप की इस साज़िश को नाकाम कर दिया और आरोपी को कठोरतम सजा से दंडित किया।
READ MORE: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर CM योगी का बड़ा संदेश, बोले – ‘हर वर्ग के साथ खड़े रहे भगवान कृष्ण’

