नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़(Nepal flood) को पांच दिन गुजर चुके हैं लेकिन कई इलाकों में स्थिति अभी सामान्य नहीं हो सकी है। हजारों परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं। बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 788 हो गई है जबकि 2,500 से अधिक लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी है। रविवार को त्रिशूली नदी का जलस्तर और बहाव अचानक तेज हो गया। करीब तीन घंटे तक नदी में तेज धार बनी रही जिसकी वजह से घ्यालचोक-चारौदी पुल टूटकर बह गया।
यह पुल गोरखा जिले के घ्यालचोक क्षेत्र को पृथ्वी हाईवे से जोड़ने वाला अहम संपर्क मार्ग था। पुल टूटने से आसपास रहने वाले करीब 400 परिवारों के लिए मुख्य रास्ता बंद हो गया है। इसका असर केवल लोगों की आवाजाही पर नहीं पड़ेगा बल्कि किसानों की रोजमर्रा की कमाई पर भी असर पड़ सकता है। स्थानीय किसान इसी पुल के रास्ते दूध और सब्जियां चारौदी की कृषि सहकारी संस्था तक पहुंचाते थे।
दूसरा रास्ता भी हो चुका है बंद
स्थानीय लोगों की परेशानी इसलिए और बढ़ गई है क्योंकि 26 अगस्त को आई बाढ़ में धवादिघाट का पुल भी बह गया था। यानी लोगों के लिए बचा हुआ दूसरा महत्वपूर्ण रास्ता भी अब बंद हो चुका है।
मलबे में अपनों की तलाश जारी
बाढ़ का पानी कुछ जगहों पर कम हुआ है, लेकिन खतरा और मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। टूटी सड़कें, कीचड़ और जगह-जगह जमा मलबा राहत एवं बचाव कार्य में बाधा बन रहा है। बचाव दल लगातार उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं, जिनका अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है।
अज्ञात शवों का सामूहिक अंतिम संस्कार
बड़ी संख्या में शव मिलने के बाद उनकी पहचान करना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जिन शवों की पहचान नहीं हो पा रही है उनकी जरूरी जांच और प्रक्रिया पूरी करने के बाद सामूहिक रूप से अंतिम संस्कार किया जा रहा है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, अब तक करीब 9,500 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। इसके बावजूद नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।