प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब पुलिस के निलंबित उप महानिरीक्षक (DIG) हरचरण सिंह भुल्लर को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में शुक्रवार को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई अदालत में ED के विशेष लोक अभियोजक ने आरोपी की 14 दिनों की हिरासत की मांग की है। एजेंसी का कहना है कि रिश्वतखोरी के इस मामले में पैसे के लेन-देन के पूरे चक्र और इसमें शामिल बड़े गठजोड़ का पर्दाफाश करने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ बेहद जरूरी है। इसके साथ ही आरोपी का सामना PMLA के तहत जुटाए गए वित्तीय दस्तावेजों से कराया जाना है।
बचाव पक्ष ने ED की रिमांड अर्जी का किया कड़ा विरोध
दूसरी तरफ, चंडीगढ़ स्थित सीबीआई अदालत में आरोपी के वकीलों एसपीएस भुल्लर और करनजीत सिंह ने ED की इस अर्जी का पुरजोर विरोध किया। बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में तर्क दिया कि यह आवेदन केवल मामले को लटकाने के उद्देश्य से लाया गया है, क्योंकि इस समय शिकायतकर्ता की जिरह चल रही है। उन्होंने कहा कि यह आरोपी के निष्पक्ष मुकदमे के संवैधानिक अधिकार का हनन है। वकीलों ने यह भी दावा किया कि जांच एजेंसियों के पास सभी संबंधित दस्तावेज पहले से ही मौजूद हैं, इसलिए हिरासत की कोई आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने इस पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है।
निजी बिचौलिए के जरिए मांगी गई थी भारी रिश्वत
यह पूरा मामला आकाश बट्टा नाम के एक व्यापारी की शिकायत पर शुरू हुआ था। आरोप के मुताबिक, रोपड़ रेंज के तत्कालीन डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर ने सरहिंद पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी में रियायत देने और कारोबारी के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम न उठाने के एवज में अपने एक निजी बिचौलिए कृषानू शारदा के माध्यम से अवैध रकम मांगी थी। शिकायत मिलने पर सीबीआई ने BNS की धारा 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
सीबीआई की रेड में मिला था 7.5 करोड़ कैश और 2.5 किलो सोना
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई ने 16 अक्टूबर 2025 को एक जाल बिछाया था, जहां आरोपी के सहयोगी कृषानू शारदा को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। उसी दिन डीआईजी भुल्लर को भी हिरासत में ले लिया गया था। इसके बाद जब सीबीआई की टीम ने सेक्टर-40, चंडीगढ़ स्थित उनके आवास पर छापेमारी की, तो वहां से लगभग 7.5 करोड़ रुपये नकद और करीब 2.5 किलोग्राम सोना बरामद हुआ था। इसी आय से अधिक संपत्ति और रिश्वत के पैसे को वैध बनाने के आरोपों की जांच के तहत ED ने पिछले साल 6 नवंबर को PMLA का केस दर्ज किया था।
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