पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। करीब 70 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं वाली इस सीट पर BJP उम्मीदवार शंखारभ सरकार ने 75 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इससे पहले इस सीट पर आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने जीत हासिल की थी। उनके इस्तीफे के बाद हुए उपचुनाव में पार्टी ने उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को मैदान में उतारा, लेकिन वह सीट बरकरार नहीं रख सकी।
हुमायूं कबीर के हटने के बाद बदला मुकाबला
2026 के विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर रेजीनगर और नउदा, दोनों सीटों से जीते थे। बाद में उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ दी, जिसके चलते उपचुनाव कराना पड़ा। पिछले चुनाव में उन्हें 1,23,536 वोट मिले थे। BJP के बापन घोष को 64,660 और तृणमूल कांग्रेस के अताउर रहमान को 41,718 वोट मिले थे। उपचुनाव में हुमायूं कबीर की जगह उनके बेटे को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद मुकाबले का स्वरूप बदल गया। राजनीतिक विश्लेषण में इसे कबीर के व्यक्तिगत प्रभाव और उनकी पार्टी की संगठनात्मक पकड़ के बीच अंतर के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, नतीजे के पीछे केवल एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
विकास और रोजगार के मुद्दों पर BJP का प्रचार
चुनाव प्रचार के दौरान BJP ने स्थानीय विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को प्रमुखता दी। पार्टी की ओर से अस्पताल, पुल, कॉलेज और औद्योगिक पार्क जैसी परियोजनाओं का वादा किया गया। प्रवासी मजदूरों को वापस लाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की बात भी उठाई गई। BJP उम्मीदवार शंखारभ सरकार ने धार्मिक पहचान के बजाय विकास के मुद्दों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों की जरूरत कॉलेज और उद्योग जैसी सुविधाएं हैं। दूसरी ओर, हुमायूं कबीर की मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा भी चुनाव से पहले चर्चा में रही। चुनावी विश्लेषण में इस बात पर बहस है कि मतदाताओं ने धार्मिक मुद्दों की तुलना में स्थानीय जरूरतों को कितनी प्राथमिकता दी।
मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन बढ़ा
उपचुनाव के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि बंगाली मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा हिस्सा BJP के साथ आना चाहता है। उन्होंने कहा कि पार्टी को रेजीनगर में 60 फीसदी और नंदीग्राम में 80 फीसदी मुस्लिम वोट मिले। ये आंकड़े शुभेंदु अधिकारी के दावे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि BJP के सत्ता में आने को लेकर अल्पसंख्यकों के बीच जो आशंकाएं फैलाई गई थीं, वे सरकार के कामकाज के बाद कम हुई हैं। वहीं, 6 अक्टूबर को मतदान के दिन हुमायूं कबीर और पुलिस के बीच विवाद तथा उनकी गिरफ्तारी ने भी राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया। कबीर ने पुलिस पर मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप का आरोप लगाया था, जबकि BJP और राज्य नेतृत्व ने धांधली के आरोपों को खारिज किया। रेजीनगर का नतीजा राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय जरूर बना है, लेकिन मुस्लिम मतदाताओं के व्यापक रुझान के बारे में निष्कर्ष निकालने के लिए अन्य क्षेत्रों के परिणाम और मतदान संबंधी आंकड़े भी देखना जरूरी होगा।
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