पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में जारी भयंकर सैन्य तनाव ने वैश्विक समुद्री व्यापार की कमर तोड़ दी है। दुनिया के एक-चौथाई कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले इस संकरे समुद्री रास्ते पर गोलाबारी और मिसाइल हमलों के कारण शिपिंग कंपनियों ने परिचालन रोक दिया है। इस वैश्विक संकट के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के सामने एक नया मास्टरप्लान रखा है। पुतिन ने भारत को ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC) जैसे सुरक्षित व्यापारिक रास्तों का संयुक्त इस्तेमाल करने का खुला प्रस्ताव दिया है।
रूस ने सफल ट्रायल के बाद भारत से मिलाया हाथ
रूसी राष्ट्रपति ने खुलासा किया कि रूस पहले ही चीन और दक्षिण कोरिया के व्यापारिक जहाजों को इन नए अंतरराष्ट्रीय जमीनी व समुद्री मार्गों से सुरक्षित निकालकर सफल ट्रायल पूरा कर चुका है। पुतिन ने कहा कि रूस और भारत के संबंध केवल माल की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि दोनों देशों को लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी रणनीतिक साझेदारी बढ़ानी चाहिए। इस कॉरिडोर के माध्यम से स्वेज़ नहर वाले पारंपरिक रास्ते की तुलना में भारत से रूस सामान भेजने का समय 45 दिनों से घटकर मात्र 20-22 दिन रह जाएगा, जबकि लागत में भी 30 से 40 प्रतिशत की भारी कमी आएगी।
ईरान में फंसा काम, अज़रबैजान में तेजी
मल्टी-लेवल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क वाले इस INSTC प्रोजेक्ट के वित्तीय पोषण और लोन के लिए रूस पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसकी रफ्तार ईरान के अंदरूनी निर्माण कार्य पर निर्भर है। पुतिन के अनुसार, जब तक ईरानी पक्ष अपने हिस्से का रेल और सड़क बुनियादी ढांचा पूरा नहीं कर लेता, तब तक परियोजना अपनी पूर्ण क्षमता से शुरू नहीं हो सकती। वहीं, अज़रबैजान के रास्ते गुजरने वाले हिस्से पर काम बिना किसी अड़चन के तेजी से प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त, रूस तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होते हुए सीधे हिंद महासागर तक सीधी रेलवे लाइन बिछाने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है।
पीएम मोदी के शांति प्रयासों की रूसी राष्ट्रपति ने की सराहना
व्यापारिक मार्गों पर चर्चा के साथ-साथ पुतिन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक कूटनीति की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर पीएम मोदी का रुख हमेशा से निष्पक्ष, संतुलित और शांति को बढ़ावा देने वाला रहा है। पुतिन ने स्वीकार किया कि पीएम मोदी घनिष्ठ द्विपक्षीय संबंधों के बावजूद लगातार युद्ध समाप्त करने पर जोर देते हैं और उनके पास ऐसे व्यावहारिक सुझाव हैं जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो सकते हैं।
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