दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को सत्य निकेतन में PG बिल्डिंग गिरने की जानलेवा घटना पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि अगर संबंधित अधिकारियों ने अपनी ज़िम्मेदारियाँ ठीक से निभाई होतीं, तो इस हादसे को रोका जा सकता था।
कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, MCD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) और नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) को नोटिस जारी कर इस घटना और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के उपायों पर जवाब माँगा है।
कोर्ट ने MCD से माँगा विस्तृत जवाब
कोर्ट ने MCD से इस बारे में विस्तृत जवाब माँगा कि क्या राजधानी में PG अकोमोडेशन के लिए कोई नियम हैं। साथ ही, कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया कि वह अपने कॉलेजों में पढ़ने वाले बाहरी छात्रों की संख्या और यूनिवर्सिटी व उसके कॉलेजों द्वारा चलाए जा रहे हॉस्टलों की संख्या का डेटा उपलब्ध कराए। कोर्ट ने NHRC समेत सभी संबंधित अधिकारियों से जवाब माँगा।
सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने प्राइवेट तौर पर चलाए जा रहे PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा पर चिंता जताई। कोर्ट के सामने यह बात रखी गई कि “ये PG बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं, ये सुरक्षा नहीं दे सकते।” साथ ही, हॉस्टल की कमी पर भी ज़ोर दिया गया और कहा गया कि “समस्या इसलिए है क्योंकि हॉस्टलों की कमी है।”
यह PIL सत्य निकेतन में लड़कों के PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही बिल्डिंग के गिरने के बाद दायर की गई थी, जहाँ कथित तौर पर लगभग 50 छात्र रह रहे थे। इस घटना में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि बचाव दलों ने मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला और घायलों को अस्पतालों में पहुँचाया।
याचिकाकर्ता ने कथित अवैध निर्माण पर भी चिंता जताई और सवाल उठाया कि क्या PG मालिक मंज़ूरी से ज़्यादा निर्माण कर रहे थे। कोर्ट की टिप्पणियों ने दिल्ली में छात्रों के रहने की व्यवस्था के बड़े मुद्दे पर ध्यान खींचा है, खासकर हॉस्टल की पर्याप्त सुविधाएँ न होने के कारण प्राइवेट PG पर निर्भरता के मुद्दे पर। इस बीच, गिरी हुई बिल्डिंग के मालिक को गिरफ़्तार कर लिया गया है और पुलिस घटना के कारणों व नियमों के संभावित उल्लंघन की जाँच कर रही है।
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