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NSEL घोटाला: 13 साल बाद निवेशकों को बड़ी राहत, स्पेशल कोर्ट ने ED की ₹3,464 करोड़ की संपत्ति बेचने को दी मंजूरी

मुंबई की विशेष PMLA कोर्ट ने नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (NSEL) के वर्ष 2013 के पेमेंट डिफॉल्ट मामले में करीब 13 वर्षों से फंसे 13,000 से अधिक निवेशकों को राहत देने वाला ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जब्त की गई ₹3,464 करोड़ रुपये की कुल संपत्तियों को बेचकर राशि जुटाने की अनुमति प्रदान कर दी है। कोर्ट के इस आदेश के तहत पहले चरण में ₹1,950 करोड़ की राशि जुटाई जाएगी, जिससे सीधे तौर पर 5,682 निर्धारित लेनदारों और निवेशकों का निपटारा (सेटलमेंट) किया जाएगा।

NCLT की सेटलमेंट स्कीम और कानूनी प्रक्रिया

PMLA स्पेशल केस नंबर 4/2015 के तहत 8 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के मुताबिक, संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त अधिकतम ₹1,950 करोड़ की राशि ’63 मून्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड’ को निवेशकों के प्रतिनिधि के रूप में हस्तांतरित की जाएगी। यह कदम नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) मुंबई द्वारा 28 नवंबर 2025 को स्वीकृत की गई सेटलमेंट योजना के क्रियान्वयन के तहत उठाया गया है। इस योजना को 92% से अधिक लेनदारों का समर्थन प्राप्त था और इसे NCLAT तथा 13 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी हरी झंडी दी जा चुकी है। इसके तहत प्रत्येक पात्र निवेशक को उसके सत्यापित दावे की कम से कम 42% राशि मिलना तय हुआ है।

MPID एक्ट और अतिरिक्त राशि का प्रबंधन

चूंकि जब्त की गई कई संपत्तियां ‘महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स’ (MPID) एक्ट 1999 के तहत भी संलग्न हैं, इसलिए ED संबंधित सक्षम प्राधिकारियों के साथ मिलकर बिक्री की प्रक्रिया पूरी करेगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि संपत्तियों की नीलामी से ₹1,950 करोड़ से अधिक की राशि प्राप्त होती है, तो शेष अतिरिक्त धनराशि विशेष अदालत की निगरानी में सुरक्षित रखी जाएगी, जिसका अंतिम निर्णय केस के अंतिम अदालती फैसले के आधार पर होगा। ED ने भी पीड़ित निवेशकों के हित में इस पूरी प्रक्रिया पर अपनी अनापत्ति प्रस्तुत की है।

2013 के ₹5,600 करोड़ के घोटाले का पूरा बैकग्राउंड

NSEL मामला साल 2013 में मुंबई के एमआरए मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई प्राथमिकी के बाद प्रकाश में आया था, जिसे बाद में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंप दिया गया। जांच में सामने आया कि कमोडिटीज का वास्तविक स्टॉक उपलब्ध कराए बिना ही अवैध ट्रेडिंग की अनुमति दी गई, जिससे करीब ₹5,600 करोड़ का भुगतान संकट खड़ा हो गया। ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) 2002 के तहत जांच करते हुए अब तक 35 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के जरिए ₹3,464.03 करोड़ की संपत्तियां जब्त की हैं।

पीड़ितों को धन वापसी का निरंतर प्रयास

ED ने स्पष्ट किया है कि निवेशकों को रकम वापस दिलाने की दिशा में यह उसकी पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जस्टिस (सेवानिवृत्त) प्रदीप नंदराजोग समिति के निर्देशों पर एजेंसी ने ‘टिंबर ट्रेल ट्रैवल टुडे प्राइवेट लिमिटेड’ के ₹17.47 करोड़ मूल्य के शेयर और लाभ समिति को सौंपे थे। ED अधिकारियों के अनुसार, एजेंसी भविष्य में भी वित्तीय अपराधों से अर्जित संपत्तियों की पहचान, जब्ती और कानून के दायरे में रहते हुए असली दावेदारों को उनका पैसा वापस दिलाने के प्रयास जारी रखेगी।

 

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