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यूक्रेन युद्ध की भारी कीमत, एक महीने में रूस के 50,000 से ज्यादा सैनिक मारे गए, नाटो की रिपोर्ट से हुआ बड़ा खुलासा

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध को लेकर नाटो के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अकेले पिछले एक महीने के दौरान रूस को यूक्रेन में 50,000 से अधिक सैनिकों का नुकसान उठाना पड़ा है। इनमें से करीब 28,000 रूसी सैनिकों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा यूक्रेनी बलों के नुकसान की तुलना में कई गुना अधिक है, क्योंकि इसी अवधि में यूक्रेन के लगभग 5,000 सैनिक ही हताहत हुए हैं। ये सभी आंकड़े संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा के दौरान गुमनामी की शर्त पर साझा किए गए हैं।

‘किल जोन’ में आक्रामक बढ़त की भारी कीमत

रूसी सेना वर्तमान में यूक्रेन के भीतर लगातार आक्रामक बढ़त हासिल करने की कोशिश में जुटी हुई है। इसके तहत सैनिकों को ऐसे खतरनाक क्षेत्रों में भेजा जा रहा है जहां दुश्मन के ड्रोन, बारूदी सुरंगें, तोपखाने (आर्टिलरी) और अन्य मजबूत बचाव प्रणालियां पूरी तरह सक्रिय हैं। सामरिक रूप से इन क्षेत्रों को ‘किल जोन’ कहा जाता है। इसके बावजूद, रूसी पक्ष की तरफ से होने वाले नुकसान का अनुपात बेहद ज्यादा बना हुआ है, जो इस युद्ध की भयावहता को उजागर करता है।

सैन्य खर्च में भारी वृद्धि और क्षेत्रीय संघर्ष

इस लंबे खिंचते संघर्ष ने दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और क्षमताओं पर गहरा दबाव डाला है। रूस के सैन्य व्यय में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और इस साल उसका रक्षा खर्च मूल योजना से लगभग 40 प्रतिशत अधिक रहने का अनुमान है। हालांकि रूसी सेना लगातार दबाव बना रही है, लेकिन इसके बावजूद यूक्रेन ने भी कुछ मोर्चों पर अपनी क्षेत्रीय बढ़त हासिल की है। इतने बड़े पैमाने पर हो रहा जान-माल का नुकसान दोनों देशों की इस युद्ध को लंबे समय तक जारी रखने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।

राजनीतिक और घरेलू स्तर पर बढ़ती चुनौतियां

जर्मन खुफिया प्रमुख समेत कई अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि इस युद्ध की गतिशीलता अब ऐसे मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां इसे बिना भारी राजनीतिक कीमत चुकाए समाप्त करना लगभग असंभव हो गया है। रूस के लिए युद्ध में हो रहे इन भारी नुकसानों से घरेलू स्तर पर भी गंभीर राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इन ताजा आंकड़ों के बाद युद्ध की निरंतरता और शांति स्थापित करने के कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत पर चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं।

 

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