CBFC New Guidelines: भारत सरकार ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC के फिल्म सर्टिफिकेशन सिस्टम में कई अहम बदलाव किए हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी नई गाइडलाइन में फिल्मों में नशीले पदार्थों के सेवन, इस्तेमाल या तस्करी को दिखाने पर तय कानूनी चेतावनी देना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही फिल्मों के कंटेंट को समाज के मूल्यों और मानकों के प्रति जिम्मेदार रखने पर जोर दिया गया है।
ड्रग्स सीन के साथ दिखाना होगा यह संदेश
नई गाइडलाइन के मुताबिक, अगर किसी फिल्म में नशीले पदार्थों या साइकोट्रोपिक पदार्थों का सेवन, इस्तेमाल या तस्करी दिखाई जाती है तो ऐसे दृश्यों के साथ तय चेतावनी दिखानी होगी। इसमें लिखा होगा, ‘अवैध नशीले पदार्थ सेहत खराब करते हैं और जेल की सजा दिलाते हैं, नशीले पदार्थों को ना कहें।’ यानी फिल्मों में ड्रग्स से जुड़े कंटेंट को बिना चेतावनी के दिखाने की अनुमति नहीं होगी।
18 नए सदस्यों के साथ हुआ CBFC का पुनर्गठन
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब केंद्र सरकार ने हाल ही में CBFC के 18 नए सदस्यों की सूची जारी की है। इसमें पंकज त्रिपाठी, सुनी शेट्टी, प्रीति जिंटा और रूपाली गांगुली समेत कई चर्चित नामों को बोर्ड में शामिल किया गया है। CBFC के पुनर्गठन के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म सर्टिफिकेशन के लिए नई गाइडलाइन जारी की है।
UA कैटेगरी में उम्र के हिसाब से बदलाव
नई गाइडलाइन में फिल्मों के सर्टिफिकेशन के लिए उम्र आधारित UA कैटेगरी को भी शामिल किया गया है। अब फिल्मों को U, UA 7+, UA 13+, UA 16+, A या S सर्टिफिकेशन मिल सकता है। बच्चों को एक ही UA कैटेगरी में रखने के बजाय उनकी उम्र के आधार पर अलग-अलग वर्ग बनाए गए हैं। हालांकि, UA 7+, UA 13+ और UA 16+ कैटेगरी को 2025 में सिनेमैटोग्राफ एक्ट में बदलाव के जरिए सर्टिफिकेशन सिस्टम में पहले ही शामिल किया जा चुका है। नई गाइडलाइन में इन्हें अब U और A सर्टिफिकेशन के साथ औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।
हिंसा और अपराध को लेकर भी तय हुई सीमाएं
नई गाइडलाइन में हिंसा, अपराध, नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अन्य संवेदनशील विषयों के चित्रण को लेकर भी सीमाएं तय की गई हैं। CBFC के मुताबिक, समाज-विरोधी व्यवहार या हिंसा को आकर्षक बनाने या उसे सही ठहराने वाला चित्रण उचित नहीं माना जाएगा। बच्चों के प्रति दुर्व्यवहार, जानवरों के प्रति क्रूरता और दिव्यांग लोगों से जुड़े दृश्यों को भी बिना जरूरत दिखाने पर आपत्ति जताई गई है।
यौन हिंसा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी नजर
गाइडलाइन में यौन हिंसा, सांप्रदायिक या देश-विरोधी भावना, सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कंटेंट पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। फिल्मों के मूल्यांकन में सिर्फ किसी एक दृश्य को अलग करके देखने के बजाय पूरी फिल्म का संदर्भ, उसमें दिखाया गया समय और मौजूदा सामाजिक मानकों को ध्यान में रखा जाएगा।
तीन दशक बाद बदली फिल्म सर्टिफिकेशन गाइडलाइन
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ये नई गाइडलाइन दिसंबर 1991 में जारी की गई गाइडलाइन की जगह लेंगी। यानी तीन दशक से ज्यादा समय बाद फिल्म सर्टिफिकेशन के नियमों को अपडेट किया गया है। नई व्यवस्था में पुराने नियमों के कई मूल सिद्धांतों को बरकरार रखा गया है, लेकिन सर्टिफिकेशन सिस्टम को मौजूदा दौर के मानकों और उम्र आधारित वर्गीकरण के हिसाब से अपडेट किया गया है।
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