अयोध्या के श्रीराम मंदिर की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए ट्रस्ट(Ram Mandir Trust) में CEO यानी मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए देशभर से बड़ी संख्या में आवेदन मिले हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, आवेदन करने वालों की संख्या 5,500 से अधिक बताई गई है। इनमें प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारी और मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोग भी शामिल हैं।
CEO की नियुक्ति से पहले अयोध्या के संत समाज ने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट की है। संतों का कहना है कि मंदिर की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को मिलनी चाहिए, जिसे मठ-मंदिरों और आश्रमों की परंपराओं की अच्छी समझ हो। उनका मानना है कि रामानंदी परंपरा और धार्मिक व्यवस्थाओं से परिचित व्यक्ति मंदिर की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकता है।
आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण ने रखी राय
धार्मिक समिति के सदस्य आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण का कहना है कि मंदिर की व्यवस्था केवल प्रशासनिक तरीके से नहीं चलनी चाहिए। उनके मुताबिक, मंदिर की धार्मिक व्यवस्था और अधिकार ऐसे लोगों के हाथ में होने चाहिए जिनकी भगवान और मंदिर की परंपराओं के प्रति गहरी निष्ठा हो।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि CEO नियुक्त किया जाता है तो उसकी भूमिका और अधिकार स्पष्ट होने चाहिए। प्रशासनिक दक्षता के साथ धार्मिक समझ को भी महत्व दिया जाना जरूरी है।
धार्मिक समिति ने लिया अहम फैसला
22 जुलाई की बैठक के बाद राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था के लिए समिति को मजबूत किया गया। इसमें कई संतों और धर्माचार्यों को शामिल किया गया है। समिति का उद्देश्य पूजा-पद्धति और धार्मिक परंपराओं की निरंतरता बनाए रखना है।
इसके अलावा सावन झूलनोत्सव की तैयारियों के तहत रामलला की पालकी यात्रा की भी योजना बनाई गई है। रिपोर्टों के अनुसार, 15 अगस्त से विशेष धार्मिक आयोजन शुरू होने हैं।