गुजरात के सूरत स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर हर्ष पंड्या की मौत के मामले में पुलिस ने एक और डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। आरोपी अनुज माहेश्वरी की गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में अब तक तीन रेजिडेंट डॉक्टर पुलिस की हिरासत में आ चुके हैं। पुलिस के मुताबिक, हर्ष की मौत से पहले जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग और दुर्व्यवहार किए जाने के आरोप सामने आए थे। मामले की जांच जारी है और एक अन्य आरोपी की गिरफ्तारी अभी बाकी है। यह मामला न्यू सिविल हॉस्पिटल से संबद्ध सरकारी मेडिकल कॉलेज का है। पुलिस ने दूसरे वर्ष के चार पोस्टग्रेजुएट छात्रों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, एफआईआर एंटी-रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई थी।
तीन आरोपी गिरफ्तार
सहायक पुलिस आयुक्त जेड आर देसाई ने बताया कि अनुज माहेश्वरी को सोमवार को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले रविवार को दीक्षित गेवड़िया और हीना भूत को पुलिस ने पकड़ा था। मामले में नामजद चौथी आरोपी निराली वसावे, जो व्यारा की रहने वाली बताई गई हैं, की गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है। जांच के दौरान एंटी-रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट के साथ तकनीकी साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों को भी शामिल किया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जूनियर छात्रों के साथ कथित तौर पर क्या हुआ था और हर्ष की मौत से उसका कोई संबंध था या नहीं।
दस जूनियर डॉक्टरों को परेशान करने का आरोप
कॉलेज की ओर से दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रथम वर्ष के दस रेजिडेंट डॉक्टरों को परेशान किया गया। संस्थान के नियमों के मुताबिक, दूसरे वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों को जूनियर डॉक्टरों को काम सौंपने की अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद शिकायत में वरिष्ठ छात्रों पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, हर्ष ने मार्च-अप्रैल में कॉलेज में दाखिला लिया था। आरोप है कि इसके बाद तीन से चार महीने तक उसे और अन्य जूनियर छात्रों को अपमानित किया गया तथा उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। शिकायत में यह भी कहा गया है कि वरिष्ठ छात्रों ने फैकल्टी से जूनियर डॉक्टरों की ड्यूटी को लेकर शिकायतें की थीं।
लैब में दो घंटे रोकने के आरोप
शिकायत के अनुसार, 5 अगस्त को व्हाट्सऐप संदेश भेजकर प्रथम वर्ष के छात्रों को माइक्रोबायोलॉजी विभाग की सीरोलॉजी लैब में बुलाया गया था। आरोप है कि वहां उन्हें करीब दो घंटे तक रोके रखा गया और अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। कमेटी ने इस मामले में वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों, फैकल्टी सदस्यों, तकनीशियनों और सफाई कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने विभागाध्यक्ष डॉ. सुमैया मुल्ला और फैकल्टी सदस्यों डॉ. संगीता राजदे, डॉ. योगिता मिस्त्री तथा डॉ. लतिका पुरोहित को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए थे। हालांकि, एंटी-रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट में शारीरिक प्रताड़ना के सबूत मिलने की पुष्टि नहीं हुई। रिपोर्ट में ऐसा प्रमाण भी नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि शारीरिक प्रताड़ना के कारण हर्ष की मौत हुई। ऐसे में कथित रैगिंग और छात्र की मौत के बीच संबंध की जांच अभी जारी है।
Read More

