सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’(Mahaprabhu Jagannath) की रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इस मामले में ओडिशा सरकार ने अदालत से फिल्म की रिलीज़ रोकने की अपील की थी लेकिन कोर्ट ने पहले दिए गए अपने आदेश को ही बरकरार रखा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ किया कि कानून को कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति के मामले में किसी भी तरह का गैर जरूरी दखल नहीं देना चाहिए।
सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि यदि कुछ लोगों की आपत्तियों के आधार पर हर रचनात्मक कार्य पर रोक लगाई जाने लगे तो भविष्य में देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं से जुड़ी किसी भी तरह की कलात्मक प्रस्तुति हो ही नहीं पाएगी। उन्होंने कहा कि हर कलाकार की अपनी सोच और अभिव्यक्ति होती है, जिसे सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस तरह के प्रतिबंध लगाए गए तो रामायण, महाभारत जैसी महान कथाओं पर बनने वाली फिल्में, टीवी कार्यक्रम, चित्रकला और मूर्तिकला जैसी कलाओं पर भी असर पड़ सकता है।
CBFC के प्रमाणपत्र का भी हुआ जिक्र
सुनवाई के दौरान जस्टिस आर. महादेवन ने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) द्वारा प्रमाणपत्र दिया जा चुका है। इसका मतलब है कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फिल्म की समीक्षा करने के बाद उसके प्रदर्शन की अनुमति प्रदान की गई है।
कोर्ट ने पहले के आदेश में नहीं किया बदलाव
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई को सुनवाई के दौरान फिल्म की रिलीज़ को अस्थायी रूप से रोकते हुए निर्देश दिया था कि इसे रथ यात्रा समाप्त होने के बाद ही रिलीज़ किया जाए। रथ यात्रा 16 जुलाई से 27 जुलाई तक आयोजित हुई थी। अदालत ने फिल्म को 28 जुलाई या उसके बाद रिलीज़ करने की अनुमति दी थी। अब ओडिशा सरकार द्वारा आदेश में बदलाव की मांग किए जाने पर भी कोर्ट ने अपना पहले का फैसला ही कायम रखा।