एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस देने के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि भारत में सैटकॉम सेवाओं के लिए एक समान नीति लागू है और अब तक तीन कंपनियों को लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस की भूमिका पर तंज कसते हुए सिंधिया ने कहा कि पार्टी को खुद नहीं पता कि वह किस दिशा में जा रही है।
सिंधिया ने कांग्रेस पर साधा निशाना
सिंधिया ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को यह स्पष्ट नहीं है कि उसे दाएं जाना है या बाएं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में कांग्रेस को इस बात पर आपत्ति थी कि एक खास कारोबारी को लाइसेंस क्यों नहीं दिया गया, जबकि अब लाइसेंस को लेकर अलग तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं।उनकी यह टिप्पणी स्टारलिंक के लाइसेंस को लेकर कांग्रेस और एलन मस्क के बयानों के बीच आई है। मस्क ने भारत में अपनी कंपनी को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।
तीन कंपनियों को लाइसेंस
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस दिए जा चुके हैं। हालांकि, लाइसेंस मिलने के बाद भी कंपनियां तुरंत सेवा शुरू नहीं कर सकतीं। इसके लिए जरूरी नियामकीय और सुरक्षा मंजूरियां हासिल करना आवश्यक है। सिंधिया ने बताया कि सरकार राजस्व के आधार पर शुल्क तय करने के बाद संबंधित कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटित करेगी। इसके साथ ही सुरक्षा संबंधी मंजूरियां पूरी होने पर कंपनियां भारत में अपना परिचालन शुरू कर सकेंगी।
एलन मस्क ने लगाए थे मोनोपॉली के आरोप
यह विवाद तब चर्चा में आया, जब एलन मस्क की एक सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत में कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूह अपना एकाधिकार बनाए रखने के लिए स्टारलिंक की राह में बाधा डाल रहे हैं। इसके बाद दूरसंचार मंत्रालय ने गुरुवार को भारत की नियामकीय व्यवस्था को लेकर जानकारी दी। सरकार का कहना है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए सभी कंपनियों पर समान नियम लागू होते हैं और किसी कंपनी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।
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