दिल्ली के नई दिल्ली इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और उपद्रव रोकने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है। 2 अक्टूबर से 9 अक्टूबर के बीच प्रतिबंधों का उल्लंघन करने, पुलिस से मारपीट और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोपों में दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग मामलों में करीब 25 एफआईआर दर्ज की हैं। इन मामलों में कांग्रेस और वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं के नाम शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
धारा 163 लागू होने पर क्या-क्या पाबंदियां रहती हैं?
धारा 163 लागू होने के बाद किसी भी स्थान पर बिना लिखित अनुमति के पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक रहती है। इस दौरान सार्वजनिक सभा, जुलूस, धरना-प्रदर्शन, नारेबाजी और भाषणबाजी पर पूरी तरह प्रतिबंध होता है। इसके अलावा किसी भी प्रकार के हथियार जैसे बंदूक, तलवार, लाठी-डंडे या ईंट-पत्थर साथ लेकर चलने पर सख्त मनाही होती है। यह आदेश जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा आपात स्थिति में जारी किया जाता है।
आदेश तोड़ने पर जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान
यदि कोई व्यक्ति धारा 163 का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है। सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने या परेशानी खड़ी करने पर 6 महीने तक की साधारण कैद और 2,500 रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। वहीं दंगा भड़काने या मानव जीवन व सुरक्षा को खतरा पहुंचाने की स्थिति में 1 साल तक की जेल और 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। पुलिस पर हमला करने या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर अन्य गंभीर धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
पुराने कानून की धारा 144 का ही नया रूप है धारा 163
कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या धारा 163 और धारा 144 अलग-अलग हैं? दरअसल, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 का ही नया रूप है। नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद इसका नंबर बदल दिया गया है, लेकिन इसका मुख्य मकसद पहले की तरह ही आपात स्थिति में तुरंत प्रतिबंध लगाकर उपद्रव और अशांति को रोकना है।
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