खाड़ी क्षेत्र, उसके आसपास के इलाकों और काला सागर में व्यापारिक जहाजों तथा नाविकों पर हुए हमलों को लेकर भारत और लाइबेरिया ने कड़ा रुख अपनाया है। दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी कर इन घटनाओं की निंदा की और हमलों को तत्काल रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि समुद्री व्यापार को बाधित करने और नाविकों की जान खतरे में डालने वाली ऐसी घटनाओं को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
खाड़ी क्षेत्र और काला सागर में हमलों पर चिंता
संयुक्त बयान के मुताबिक, बीते कुछ दिनों में खाड़ी क्षेत्र और उसके आसपास के समुद्री इलाकों के साथ-साथ काला सागर में भी व्यापारिक जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों को निशाना बनाया गया है। भारत और लाइबेरिया ने इन घटनाओं को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि ऐसे हमलों को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। दोनों देशों ने हमलों में जान गंवाने वाले नाविकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायल नाविकों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। बयान में समुद्र में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
संयुक्त राष्ट्र में दोनों देशों ने जारी किया बयान
यह बयान संयुक्त राष्ट्र में भारत और लाइबेरिया के स्थायी मिशनों की ओर से जारी किया गया। दोनों देश ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स’, यानी ‘जीओएफ ऑन एस4’, के सह-अध्यक्ष हैं। यह समूह समुद्री जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से बनाया गया है। भारत और लाइबेरिया ने कहा कि समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए देशों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
25 सितंबर को हुई थी समूह की शुरुआत
संयुक्त बयान के अनुसार, भारत और लाइबेरिया ने 25 सितंबर 2026 को जीओएफ ऑन एस4 की शुरुआत की थी। दोनों देशों ने इस पहल के जरिए समुद्री जहाजों और नाविकों पर होने वाले हमलों को दोबारा रोकने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है। बयान में कहा गया कि समुद्री मार्गों पर हमले केवल जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा का मामला नहीं हैं, बल्कि इनसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी प्रभावित होता है। जहाजों के जरिए दुनिया भर में सामान पहुंचाया जाता है, इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत और लाइबेरिया ने नाविकों के अधिकारों की रक्षा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने की बात कही है।
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