Delhi-NCR Firecrackers: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 7 और 8 नवंबर 2026 को ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी है। लोग सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे चला सकेंगे। यानी निर्धारित समय के अलावा पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी। यह लगातार दूसरा साल है जब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में सीमित समय के लिए ग्रीन पटाखों की अनुमति दी है।
अस्पताल और वृद्धाश्रम के 300 मीटर दायरे में रोक
सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और अधिसूचित साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इन इलाकों के साथ शैक्षणिक संस्थानों को भी ‘नो-क्रैकर जोन’ घोषित करने का निर्देश दिया है। इन क्षेत्रों की उचित मार्किंग करने और लोगों को इसकी जानकारी देने को भी कहा गया है।
दिल्ली में पटाखों को लेकर 5 साल में क्या बदला?
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 15 अक्टूबर को दिल्ली-NCR में पटाखे चलाने को लेकर आदेश दिया था। उस समय 19 और 20 अक्टूबर को केवल ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति दी गई थी। इससे पहले 2022, 2023 और 2024 में दिल्ली-NCR में सभी तरह के पटाखों पर रोक थी। 2025 में पहली बार दो दिन के लिए ग्रीन पटाखों को सीमित अनुमति मिली और 2026 में भी यही व्यवस्था जारी रखी गई है। 2022 से पहले दिल्ली-NCR में पटाखे चलाने की सीमित अनुमति थी।
ग्रीन पटाखे क्यों माने जाते हैं कम प्रदूषणकारी?
ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से तैयार किए जाते हैं। इनमें कुछ हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल कम किया जाता है, जिससे इनके जलने पर धुआं और हानिकारक गैसें अपेक्षाकृत कम निकलती हैं। दावा है कि सामान्य पटाखों की तुलना में ये करीब 30% तक कम प्रदूषण फैलाते हैं। कुछ ग्रीन पटाखों में ध्वनि प्रदूषण भी कम होता है और बेरियम नाइट्रेट जैसे कुछ हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
असली ग्रीन पटाखों की ऐसे होगी पहचान
वास्तविक ग्रीन पटाखों की पहचान के लिए उन पर CSIR-NEERI का लोगो और QR कोड होना जरूरी है। ऐसे पटाखों को सामान्य पटाखों से अलग पहचानने में यह निशान मदद करता है।
30 सितंबर को कोर्ट ने कहा था- 24 घंटे पटाखे नहीं चला सकते
30 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पटाखों पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जाएगी, लेकिन चौबीसों घंटे पटाखे चलाने की अनुमति भी नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा था कि दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाते हुए पटाखे चलाने के लिए निश्चित समय तय किया जा सकता है।
29 अक्टूबर को विराट कोहली का भी जिक्र
29 अक्टूबर की सुनवाई में कोर्ट ने प्रदूषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विराट कोहली जैसी मशहूर हस्तियों की मदद लेने का सुझाव दिया था। कोर्ट ने कहा था कि सेलिब्रिटीज से वीडियो या संदेश रिकॉर्ड कराकर लोगों से प्रदूषण बढ़ाए बिना दिवाली मनाने की अपील कराई जा सकती है।
वायु प्रदूषण से 20.1 लाख से ज्यादा मौतों का जिक्र
मामले में कोर्ट की सहायता कर रहीं एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ वकील उत्तरा बब्बर ने दिल्ली-NCR में पटाखों से होने वाले प्रदूषण और इसके स्वास्थ्य पर असर की जानकारी दी थी। उन्होंने स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2025 रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया था कि भारत में वायु प्रदूषण मौतों के प्रमुख कारणों में सबसे आगे है। इसके कारण देश में 20.1 लाख से ज्यादा मौतें हुईं, जिनमें 21% मौतें पांच साल से कम उम्र के बच्चों की थीं।
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