त्रिपुरा में सरकारी टेंडर दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी के अगरतला सब-जोनल ऑफिस की टीम ने बुधवार को त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में कुल 13 ठिकानों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। मामला त्रिपुरा कैडर के एक निलंबित IAS अधिकारी और उसके कथित सहयोगियों से जुड़ा है।
ED के मुताबिक, आरोपियों पर फर्जी सरकारी टेंडर का भरोसा दिलाकर कई लोगों से 44 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने का आरोप है। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच पश्चिम त्रिपुरा जिले के कैपिटल कॉम्प्लेक्स पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई। यह मामला नागपुर की कंपनी मेसर्स एस.के. सेल्स कॉर्पोरेशन की शिकायत पर दर्ज हुआ था।
14.55 करोड़ रुपये EMD के नाम पर लेने का आरोप
शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि उसे सरकारी टेंडर दिलाने का झांसा देकर रकम जमा कराने के लिए कहा गया। सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच कंपनी से करीब 14.55 करोड़ रुपये बतौर बयाना राशि (EMD) लिए गए। यह रकम कथित तौर पर मिड-डे मील और बिजली क्षेत्र से जुड़े सरकारी टेंडरों के नाम पर वसूली गई थी। हालांकि, जांच एजेंसी के अनुसार, जिन टेंडरों के लिए पैसे जमा कराए गए थे, वे वास्तव में कभी जारी ही नहीं हुए। इसी आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच शुरू की है।
हवाला नेटवर्क और डिजिटल सबूतों की जांच
छापेमारी के दौरान ED ने निलंबित IAS अधिकारी के आवास के अलावा उत्तर त्रिपुरा के धर्मनगर सब-डिवीजन में कथित हवाला ऑपरेटरों से जुड़े ठिकानों की भी तलाशी ली। आरोप है कि इन लोगों को भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए जिम्मेदार आधिकारिक व्यक्तियों के रूप में पेश किया गया था। एजेंसी ने पैसों के लेनदेन से जुड़ी कई कंपनियों और संस्थाओं के कार्यालयों की भी जांच की। तलाशी में हवाला लेनदेन से संबंधित दस्तावेज, महंगी संपत्तियों की जानकारी और कुछ कॉरपोरेट संस्थाओं पर संदिग्ध नियंत्रण से जुड़े रिकॉर्ड मिले हैं।
इसके अलावा आरोपियों से जुड़े डिजिटल उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं। ED अब इन सबूतों का विश्लेषण कर यह पता लगाने में जुटी है कि कथित ठगी की रकम कहां भेजी गई, किन लोगों ने इसका इस्तेमाल किया और पूरे नेटवर्क में अन्य कौन-कौन शामिल थे।
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