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E100 गाड़ियों को मंजूरी के बाद उठे सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- देश में इथेनॉल की सप्लाई कैसे होगी?

भारत में पेट्रोल के विकल्प के तौर पर इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने 100% तक इथेनॉल से चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए नियमों में बदलाव किया है। हालांकि, इस फैसले के साथ ही ईंधन की उपलब्धता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से पूछा है कि अगर देश में E100 यानी लगभग शुद्ध इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों की संख्या बढ़ती है, तो उनकी जरूरत के मुताबिक ईंधन की आपूर्ति कैसे सुनिश्चित की जाएगी। अदालत ने इस नीति में किसानों के हितों को भी अहम बताया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा सप्लाई का रोडमैप

गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए इथेनॉल की उपलब्धता पर सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि जब 100% इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों को अनुमति देने की बात सामने आई है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के लिए पर्याप्त ईंधन कहां से आएगा। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि इसके लिए मैन्युफैक्चरिंग और उत्पादन व्यवस्था में बड़े स्तर पर बदलाव करने होंगे। यानी E100 वाहनों का इस्तेमाल व्यापक होने पर देश को इथेनॉल के उत्पादन और आपूर्ति की क्षमता भी उसी हिसाब से बढ़ानी होगी।

इथेनॉल नीति में किसानों के हितों पर जोर

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इथेनॉल नीति को केवल ईंधन और पर्यावरण के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर भी विचार जरूरी है। जस्टिस सुंदरेश ने किसानों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि देश की बड़ी आबादी गांवों में रहती है और ग्रामीण लोगों के हितों को भी पर्याप्त महत्व मिलना चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि इथेनॉल को बढ़ावा देने से किसानों को होने वाले संभावित लाभ पर भी चर्चा होनी चाहिए। अटॉर्नी जनरल ने भरोसा दिलाया कि वह आगे अपनी दलीलों में किसानों से जुड़े पहलुओं को शामिल करेंगे। सुनवाई के दौरान एक वकील ने भी कहा कि इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने से किसानों को फायदा हो सकता है। वहीं, दूसरे वकील ने दलील दी कि सरकार की मौजूदा नीति में किसानों के हितों का ध्यान रखा गया है।

E100 के लिए बदले नियम

यह मामला इथेनॉल सप्लाई ईयर 2025-26 के दौरान ईंधन वितरण से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई में सामने आया। इससे पहले 30 जून को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के एक निर्देश पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने इथेनॉल की आपूर्ति बढ़ाने की मांग पर विचार करने को कहा था। एक ऑयल मार्केटिंग कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि हाईकोर्ट का आदेश पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग की नीति को प्रभावित कर सकता है। इधर, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर 2026 को सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E100 को भी नियमों में जगह दी गई है। मंत्रालय ने उत्सर्जन प्रमाणन से जुड़े नियमों में E85 और E100 को स्पष्ट रूप से शामिल किया है। E85 में 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है, जबकि E100 में लगभग पूरी मात्रा इथेनॉल की होती है। ऐसे वाहनों के इंजन और ईंधन प्रणाली को अलग-अलग अनुपात वाले ईंधन पर चलने के अनुकूल बनाया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगले महीने तय की है।

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Ram Janam Chauhan
Ram Janam Chauhanhttp://mhone.in
राम जनम चौहान वर्तमान में MH One News के साथ जुड़े हुए हैं। वे मुख्य रूप से पॉलिटिक्स और नेशनल न्यूज़ को कवर करते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक जागरण संस्थान के साथ की। इसके अलावा Zee Media और India News में इंटर्नशिप की है। राम जनम चौहान ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज (गोकलपुरी, दिल्ली) से पत्रकारिता एवं जनसंचार (BJMC) की डिग्री प्राप्त की है।
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