साइबर ठगी करने वालों ने पुलिस की निगरानी से बचने के लिए एक नया तरीका अपनाया। किसी दफ्तर या एक निश्चित जगह पर बैठकर लोगों को फोन करने के बजाय आरोपियों ने SUV को ही अपना चलता-फिरता कॉल सेंटर बना लिया। गाड़ी की लोकेशन बदलती रहती थी, लेकिन लोगों को फोन कर ठगने का कथित धंधा जारी रहता था। दिल्ली पुलिस ने ऐसे ही एक साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की SUV से सात मोबाइल फोन, 15 बैंक, डेबिट और मेट्रो कार्ड, छह चेकबुक, तीन पासबुक और कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इनमें पांच PAN कार्ड, चार आधार कार्ड या उनकी कॉपी, हस्ताक्षर किया हुआ एक चेक और ग्राहकों की सूची वाले नौ पन्ने भी शामिल हैं। पुलिस को संदेह है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल ठगी के नेटवर्क को संचालित करने में किया जा रहा था।
45 लाख रुपये वापस दिलाने के नाम पर ठगी
इस मामले की शुरुआत मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के निवासी नीलेश की शिकायत से हुई। उन्होंने पुलिस को बताया कि उन्हें बीमा पॉलिसियों में निवेश किए गए 45 लाख रुपये वापस दिलाने का भरोसा दिया गया था। हालांकि, रिफंड की प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर उनसे 65 हजार रुपये वसूल लिए गए। शिकायत मिलने के बाद पूर्वी दिल्ली में FIR दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस को हिमांशु राठौर से जुड़े एक बैंक खाते के बारे में जानकारी मिली। इस खाते से संबंधित संदिग्ध लेनदेन की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर भी दर्ज थी। बैंक खाते की पड़ताल से पुलिस को नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिली।
ओल्ड कोंडली में पकड़ी गई SUV
पुलिस ने तकनीकी जांच और निगरानी के जरिए संदिग्धों की गतिविधियों का पता लगाया। जांच के बाद पूर्वी दिल्ली के ओल्ड कोंडली इलाके में SUV को रोककर कार्रवाई की गई। पुलिस ने इस मामले में 37 वर्षीय लोकेश तोमर, हिमांशु राठौर और 35 वर्षीय तुषार को गिरफ्तार किया है। तीनों दिल्ली के निवासी बताए गए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी गाड़ी में बैठकर लोगों को फोन करते थे और लगातार जगह बदलते रहते थे। इससे किसी एक ठिकाने पर उनकी गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो जाता था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसके जरिए कितने लोगों को निशाना बनाया गया।
तीनों की अलग-अलग भूमिका, कई दस्तावेज बरामद
जांच के मुताबिक, लोकेश तोमर कथित तौर पर नेटवर्क के कामकाज में समन्वय करता था और ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में भेजने के लिए इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक अकाउंट संभालने में उसकी भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस मुंबई और तेलंगाना में दर्ज साइबर ठगी के मामलों से उसके संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर रही है। वहीं, तुषार पर संभावित पीड़ितों से संपर्क करने और अधिकारी या कंपनी का एजेंट बनकर उनकी बैंकिंग जानकारी, OTP तथा लॉगिन डिटेल हासिल करने की कोशिश करने का आरोप है। हिमांशु राठौर कथित तौर पर नेटवर्क को बैंक खाते उपलब्ध कराता था, जिनमें ठगी की रकम जमा कराई जाती और फिर कमीशन के बदले आगे भेजी जाती थी। SUV से मिले अन्य सामान में दो किराये के एग्रीमेंट, 11 पासपोर्ट साइज फोटो और NPCI की संदिग्ध फर्जी मुहर भी शामिल है। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या गलत पते के आधार पर बैंक खाते खुलवाए गए थे और क्या उन्हें बाद में नेटवर्क के अन्य सदस्यों को सौंपा गया। फिलहाल मोबाइल फोन, बैंक खातों और बरामद दस्तावेजों की जांच जारी है। पुलिस ठगी की कुल रकम, संभावित पीड़ितों की संख्या और दूसरे राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों से नेटवर्क के संबंधों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
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