Paris Swaminarayan Temple: फ्रांस की राजधानी पेरिस में रविवार को देश का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बीएपीएस अक्षरधाम संस्थान के गुरु महंतस्वामी महाराज ने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम पूरा किया। समारोह में यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया से आए संतों, भक्तों और गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया।
PM मोदी ने बताया ऐतिहासिक अवसर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि पेरिस में बना यह भव्य मंदिर सदियों तक दोनों देशों के बीच सहयोग और अवसरों के प्रतीक के रूप में खड़ा रहेगा।
भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों पर- PM मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हाल के वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं। मेरे मित्र राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि यह रणनीतिक साझेदारी पुराने सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है।
मंदिर में दिखा भारतीय वास्तुकला और फ्रांसीसी तकनीक का मेल
मंदिर का निर्माण प्राचीन भारतीय वास्तुकला और वैदिक शिल्पशास्त्र के आधार पर किया गया है। इसमें फ्रांस की आधुनिक तकनीक का भी सुंदर समावेश किया गया है। 5000 वर्गमीटर क्षेत्र में फैले इस परिसर के ऊपरी तल पर पारंपरिक मंदिर है, जबकि नीचे सांस्कृतिक केंद्र के रूप में हवेली बनाई गई है।
13 दिन चला भव्य महोत्सव
मंदिर से जुड़े 13 दिनों तक चले इस महोत्सव में 40 से अधिक देशों के लोगों ने हिस्सा लिया। प्राण प्रतिष्ठा से पहले पेरिस में भव्य नगर यात्रा निकाली गई, जिसने भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म की झलक दुनिया के सामने पेश की।
14 रथों में निकली नगर यात्रा
नगर यात्रा में 14 सुसज्जित रथ शामिल थे, जिनमें हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां सजाई गई थीं। पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुतियां दीं। यात्रा एफिल टावर और एकोल मिलिटेर से होते हुए प्लास द ला कॉनकॉर्ड तक पहुंची। इस आयोजन को फ्रांस में भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म से जुड़े नए अध्याय के तौर पर देखा गया।
AI, रक्षा और अंतरिक्ष में बढ़ी साझेदारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी, AI, रक्षा, अंतरिक्ष और जलवायु जैसे क्षेत्रों में भारत और फ्रांस नई गति और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देश 2026 को भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के रूप में भी मना रहे हैं।
‘भारतीय सैनिकों के बलिदान की याद आज भी जीवित’
प्रधानमंत्री ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान की याद आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। उन्होंने कहा, ‘भाषा प्रेमी यह भी जानते हैं कि संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में फ्रांसीसी विद्वानों ने बड़ी भूमिका निभाई थी। रोमां रोलां के रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर लिखे गए कार्यों ने हमारे समाजों को और करीब लाने का काम किया।’
आध्यात्मिक संबंधों का भी किया जिक्र
PM मोदी ने कहा कि पेरिस से पुडुचेरी स्थित श्री अरविंद आश्रम तक ‘द मदर’ की आध्यात्मिक यात्रा ने भारत और फ्रांस के असंख्य साधकों को प्रेरित किया है। उन्होंने बताया कि कई दशक पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे, जिससे इस्कॉन के माध्यम से दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक संबंधों का नया अध्याय शुरू हुआ।
योग बना दोनों देशों को जोड़ने वाला माध्यम
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘आज योग भी दोनों देशों के लोगों को जोड़ने वाला एक माध्यम बन गया है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर एफिल टावर की तस्वीरें फ्रांस में योग की अपार लोकप्रियता को दर्शाती हैं।’
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