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आर्थिक मंदी आई तो आपके पैसे का क्या होगा? ‘रिच डैड पुअर डैड’ के राइटर ने अमेरिका के वित्तीय सिस्टम की खोली पोल

मशहूर बेस्टसेलर किताब ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर अपने विचारों से वित्तीय जगत में खलबली मचा दी है। एक्स पर अपने 2.9 मिलियन फॉलोअर्स के साथ साझा किए गए एक नए पोस्ट में उन्होंने खुद को ‘प्रेपर’ यानी आने वाले आर्थिक संकट के लिए पहले से तैयार रहने वाला व्यक्ति बताया है। उनके इस पोस्ट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और कागजी मुद्रा की विश्वसनीयता पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

 

कार इंश्योरेंस का उदाहरण देकर समझाया

कियोसाकी ने अपनी पोस्ट में एक महिला के साथ हुई बातचीत का जिक्र किया, जिसने उनसे पूछा था कि क्या संकट की तैयारी करना निराशावादी सोच नहीं है। इसके जवाब में कियोसाकी ने उससे पूछा कि क्या उसके पास कार का बीमा है? महिला ने स्वीकार किया कि वह दुर्घटना नहीं चाहती, लेकिन अनहोनी से बचाव के लिए उसने बीमा कराया है। कियोसाकी ने स्पष्ट किया कि ठीक इसी तरह वित्तीय संकट से बचने के लिए भी पहले से तैयारी करना बेहद जरूरी है।

“नोट छापने से घटती है पैसे की ताकत”

जब कियोसाकी ने महिला से पूछा कि अर्थव्यवस्था क्रैश होने पर क्या होगा, तो उसने कहा कि सरकार और अधिक पैसे छाप देगी। इस पर कियोसाकी ने करारा प्रहार करते हुए समझाया कि जब सरकारें बिना सीमा के पैसे छापती हैं, तो उससे आम जनता के पैसे की खरीदने की क्षमता घट जाती है, जिसे आम भाषा में महंगाई कहा जाता है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक नोट छापना अर्थव्यवस्था को उबारने के बजाय आम आदमी का नुकसान करता है।

अमेरिकी फेड पर लगाया संपत्ति चुराने का आरोप

रॉबर्ट कियोसाकी ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Fed) और सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे कानूनी रूप से आम नागरिकों की दौलत चुराते हैं। उनके पास मनमर्जी से नोट छापने का अधिकार है, जिसके जरिए वे टैक्स और महंगाई के माध्यम से लोगों की मेहनत की कमाई छीन लेते हैं। उन्होंने कहा कि आम जनता को इस कागजी पैसे के भ्रम से बाहर निकलना चाहिए।

सोना, चांदी और बिटकॉइन को बताया असली एसेट

वित्तीय सुरक्षा का उपाय बताते हुए कियोसाकी ने सलाह दी कि लोगों के पास ऐसे एसेट्स होने चाहिए जिन्हें सरकारें अपनी मर्जी से छाप न सकें। वे लगातार सोना, चांदी और बिटकॉइन जैसे सीमित संसाधनों में निवेश करने की वकालत करते रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उनके पास खुद के तेल के कुएं भी हैं, जहां सरकारें उनकी बड़ी ग्राहक हैं और खुद उन्हें भुगतान करती हैं।

 

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