उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में हुए नुकसान की भरपाई और जनाधार वापस पाने के लिए पार्टी तीन स्तरों पर जनसंपर्क अभियान चलाएगी। इसकी रणनीति बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी विनोद तावड़े ने तैयार की है। नवंबर और दिसंबर में बड़े नेताओं के कार्यक्रमों के साथ कमजोर बूथों और सामाजिक समीकरणों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
PM मोदी-अमित शाह संभालेंगे चुनावी कमान
बीजेपी की योजना के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्षेत्रीय स्तर पर बड़ी रैलियां करेंगे। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जिला स्तर पर संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति की निगरानी करेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन विधानसभा स्तर पर जनसंपर्क कार्यक्रमों और संगठनात्मक बैठकों के जरिए अभियान को आगे बढ़ाएंगे। पार्टी का लक्ष्य बड़े नेताओं की रैलियों के साथ जमीनी स्तर पर भी मतदाताओं तक पहुंच बनाना है।
युवाओं और कमजोर बूथों पर नजर
विनोद तावड़े की रणनीति के तहत कमजोर बूथों की पहचान कर वहां विशेष अभियान चलाया जाएगा। युवा, पिछड़े वर्ग और दलित समुदाय के लोगों की अलग-अलग टीमें बनाकर संपर्क बढ़ाने की योजना है। सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं तक भी पहुंच बनाई जाएगी। बीजेपी युवाओं के बीच समाजवादी पार्टी के शासनकाल से जुड़े मुद्दे उठाकर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करेगी।
सामाजिक समीकरणों से सपा को चुनौती
बीजेपी अलग-अलग समुदायों के बीच सामाजिक चौपालें आयोजित कर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने की तैयारी में है। पार्टी की रणनीति हिंदू मतदाताओं को एकजुट कर समाजवादी पार्टी के पीडीए समीकरण का मुकाबला करने की है। इसके अलावा, पंचायत और लोकसभा चुनाव की मतदाता सूचियों के बीच समन्वय बढ़ाकर बूथ स्तर पर संगठन मजबूत किया जाएगा। हालिया बैठक में विनोद तावड़े ने भेड़ और भेड़िये की कहानी के जरिए सपा पर लोगों को भ्रमित करने का आरोप भी लगाया था। नवंबर-दिसंबर में प्रस्तावित अभियान के जरिए बीजेपी प्रदेश में अपना जनाधार मजबूत करने की कोशिश करेगी।
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