संसद के मानसून सत्र के नौवें दिन लोकसभा ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। इससे एक दिन पहले 29 जुलाई को यह विधेयक राज्यसभा से भी पारित हो चुका था। अब दोनों सदनों की मंजूरी मिलने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की सहमति मिलने और राजपत्र (गजट ऑफ इंडिया) में अधिसूचना जारी होने के बाद यह कानून लागू हो जाएगा।
विपक्ष के विरोध के बीच हुई विधेयक की मंजूरी
गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक को विचार और पारित करने के लिए सदन में पेश किया। मतदान के बाद विधेयक को मंजूरी मिल गई। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही 31 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी गई। यह संशोधन राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में बदलाव का प्रावधान करता है।
सरकार ने बताया क्यों जरूरी है संशोधन?
सरकार की ओर से इस विधेयक को पहले राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पेश किया था। बहस के बाद उच्च सदन ने इसे पारित कर दिया था। लोकसभा में चर्चा के दौरान नित्यानंद राय ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान किसी राजनीतिक दल या विचारधारा का विषय नहीं, बल्कि पूरे देश की सामूहिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, यह विधेयक राष्ट्र की गरिमा और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने के लक्ष्य से लाया गया है।
‘वंदे मातरम्’ को मिलेगा राष्ट्रगान जैसी कानूनी संरक्षण
विधेयक के कानून बनने के बाद ‘वंदे मातरम्’ को भी वही कानूनी संरक्षण मिलेगा, जो अभी राष्ट्रीय ध्वज, भारतीय संविधान और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को प्राप्त है। संशोधित कानून के तहत ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करना, इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालना या इसे गाने से रोकना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
उल्लंघन पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान
विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति इन प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो उसे तीन वर्ष तक की जेल, जुर्माना, या दोनों की सजा हो सकती है। यही दंड वर्तमान में राष्ट्रगान के अपमान से जुड़े मामलों में भी लागू है। अब इस विधेयक के कानून बनने की अंतिम प्रक्रिया राष्ट्रपति की मंजूरी पर निर्भर है।
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