मध्य प्रदेश के शाजापुर और शुजालपुर क्षेत्र के किसानों को राहत देने के लिए वन विभाग ने बड़े पैमाने पर कृष्णमृग और नीलगायों को कूनो नेशनल पार्क भेजने का अभियान शुरू कर दिया है। अभियान के पहले ही दिन हन्नूखेड़ी और पोलायकलां के खेतों से 100 कृष्णमृगों को सुरक्षित पकड़ा गया, जिनमें से 97 को विशेष वाहनों से कूनो भेजा गया। इस बार कुल 2,000 कृष्णमृगों को स्थानांतरित करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है।
दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञ और 200 जवानों की टीम तैनात
इस हाई-टेक अंतरराष्ट्रीय अभियान में दक्षिण अफ्रीका की प्रसिद्ध ‘कंजर्वेशन सॉल्यूशंस’ के 14 विशेषज्ञ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे वन्यजीव डॉक्टरों, वन अधिकारियों और प्रशासनिक कर्मचारियों समेत 200 जवानों की संयुक्त टीम इस प्रक्रिया को संभाल रही है। रेस्क्यू के दौरान हेलीकॉप्टर से हांका लगाकर हिरणों को ‘बोमा’ यानी कपड़े के सुरक्षित बाड़े में एकत्र किया जाता है।
तापमान बढ़ने पर विशेषज्ञ सलाह के बाद रोका गया रेस्क्यू
शनिवार दोपहर तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाने पर वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों की सलाह पर काम रोक दिया गया। नोडल अधिकारी डॉ. किरण बिसेन ने बताया कि यह रेस्क्यू ऑपरेशन 11 अक्टूबर से पुनः शुरू किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पिछले चरण में भी 846 कृष्णमृगों और 67 नीलगायों सहित कुल 913 वन्यजीवों को सफलतापूर्वक नए आशियाने में शिफ्ट किया गया था।
31 अक्टूबर तक खेतों से दूर रहने की अपील
इस अभियान में स्थानीय ग्रामीणों ने अनुकरणीय अनुशासन दिखाते हुए खेतों से दूरी बनाए रखी और अपने पालतू कुत्तों को बांधकर रखा। क्षेत्रीय विधायक घनश्याम चन्द्रवंशी ने वाहनों को कूनो के लिए रवाना किया। वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि 31 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान के दौरान भीड़ न लगाएं और सुरक्षा नियमों का पालन करें, ताकि किसानों की फसलें और वन्यजीव दोनों सुरक्षित रह सकें।
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