History-Sheeter Kali Baba: उत्तर प्रदेश के झांसी में आस्था के नाम पर कथित तौर पर लोगों को प्रभावित करने वाले ‘काली बाबा’ की असली पहचान सामने आने के बाद हर कोई हैरान है। पुलिस ने जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, वह कोई दिव्य शक्तियों वाला साधु नहीं, बल्कि हरदोई का हिस्ट्रीशीटर बदमाश निकला। वह झांसी में नाम और पहचान बदलकर साधु के वेश में रह रहा था। पुलिस के मुताबिक, उसने अपना नेटवर्क इतना बढ़ा लिया था कि देश के साथ-साथ विदेशों से भी लोग उसके दरबार में पहुंचने लगे थे।
फौज जैसी वर्दी में लगाता था दरबार
झांसी का चर्चित ‘काली बाबा’ उर्फ प्रदीप शुक्ला ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से दिव्य दरबार लगाता था। माथे पर तिलक, शरीर पर भारतीय सेना जैसी वर्दी और लोगों की समस्याओं का समाधान करने के दावे के साथ वह खुद को दिव्य शक्तियों का मालिक बताता था। उसने मऊरानीपुर थाना क्षेत्र के कुरैचा गांव स्थित एक मंदिर को अपना ठिकाना बना लिया था।
भक्तों को बताता था खुद को ‘काली सरकार’
पुलिस के मुताबिक, हरदोई में फरारी काट रहा प्रदीप शुक्ला एक दिन कुरैचा गांव स्थित ‘काली सरकार मंदिर’ पहुंचा। मौका मिलने पर उसने मंदिर को ही अपना ठिकाना बना लिया। यहां उसने लोगों के सामने अपनी पहचान ‘सत्येंद्र शुक्ला उर्फ काली सरकार’ के तौर पर बताई और खुद को दिव्य शक्तियों से संपन्न बताया। इसके बाद मंदिर में उसका कथित दिव्य दरबार लगने लगा और धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोग उसके पास पहुंचने लगे।
विदेशों से भी आने लगे अनुयायी
काली बाबा का प्रभाव केवल आसपास के इलाकों तक सीमित नहीं रहा। उसके दरबार में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों के साथ विदेशों से भी भक्त आने लगे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, सोशल मीडिया के जरिए उसने अपनी पहुंच और पहचान को काफी बढ़ाया था।
इंस्टाग्राम पर एक लाख से ज्यादा फॉलोअर्स
स्थानीय जानकारी के अनुसार, आरोपी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। उसने पिछले साल ‘काली सरकार’ नाम से इंस्टाग्राम पेज बनाया था। इसी मंच के जरिए वह नियमित तौर पर ऑनलाइन दरबार लगाता था। शुक्रवार, शनिवार और रविवार को ऑनलाइन दिव्य दरबार आयोजित किया जाता था, जबकि बुधवार को मंदिर में स्थानीय लोगों के लिए ऑफलाइन दरबार लगता था।
नवरात्रि में नौ दिन दरबार बंद रखने का ऐलान
सोशल मीडिया पर काली सरकार की ओर से दरबार के कार्यक्रम की जानकारी भी साझा की जाती थी। नवरात्रि के चलते इस बार उसने नौ दिनों तक दरबार बंद रखने की सूचना सोशल मीडिया पर दी थी। इस दौरान भी उसके अनुयायियों के बीच उसकी गतिविधियों को लेकर चर्चा बनी रही।
हरदोई में दर्ज हैं कई मामले
जांच के दौरान काली बाबा की असली पहचान हरदोई के कोतवाली थाना क्षेत्र के चौहान थोक निवासी प्रदीप शुक्ला उर्फ नटराज पुत्र मायाराम शुक्ला के रूप में हुई। हरदोई पुलिस के मुताबिक वह कोतवाली थाने का हिस्ट्रीशीटर है और उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, दो मामलों में उसे भगोड़ा भी घोषित किया जा चुका है।
2014 के लूट मामले में था फरार
आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों में साल 2014 का लूट का एक मामला भी शामिल है। इस मामले में वह लंबे समय से फरार चल रहा था और अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। इसके बावजूद वह झांसी में अलग पहचान के साथ कथित तौर पर धार्मिक दरबार चला रहा था।
सोशल मीडिया से पुलिस को मिला सुराग
हरदोई पुलिस ने सोशल मीडिया पर मौजूद जानकारी के जरिए आरोपी की पहचान की। इसके बाद पुलिस टीम झांसी पहुंची और उसकी पहचान का सत्यापन किया। रविवार को हरदोई पुलिस ने मऊरानीपुर थाना पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
हकीकत सामने आते ही चौंके लोग
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने ‘काली बाबा’ के पीछे छिपी आरोपी की असली पहचान सामने रखी। उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि और पुराने मामलों की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोग भी हैरान रह गए। हरदोई पुलिस जरूरी पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए आरोपी को अपने साथ ले गई है।
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