केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उन दावों को खारिज कर दिया है कि चीन ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में किसी भारतीय गांव पर कब्ज़ा किया है। हालांकि, उन्होंने माना कि कुछ इलाकों में सीमा की स्पष्ट रूप से पहचान न होने के कारण सीमा पर इलाक़े को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग दावे हैं।
न्यूज़ एजेंसी IANS से बात करते हुए रिजिजू ने कहा कि कुछ इलाकों में भ्रम की स्थिति है क्योंकि भारतीय ग्रामीणों और चीनी तरफ रहने वाले लोगों, दोनों का ही दावा है कि उनका इलाका दूसरी तरफ तक फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को ऐसे नहीं बताया जाना चाहिए कि चीन अरुणाचल प्रदेश के अंदर 60 किलोमीटर तक घुस आया है।
Delhi: Union Minister Kiren Rijiju says, "So, it is not like they (China) came and captured our village. That is not the case. On certain land, they have cast an eye because there is no demarcation. Our people believe that our land extends further ahead, while the villages… pic.twitter.com/HhcpiwTWDH
— IANS (@ians_india) August 19, 2026
रिजिजू ने कहा कि चीन द्वारा लोंगजू के पास बनाई गई बस्ती जैसी संरचना उस इलाके में है जिस पर 1959 में चीनी सेना ने कब्ज़ा कर लिया था और बाद में 1962 में वहां अपनी मौजूदगी मज़बूत कर ली थी। उन्होंने कहा कि सीमा बिंदु पर भारत की भी एक पोस्ट है, जबकि 1962 की लड़ाई के बाद से इस इलाके में दोनों देशों के बीच आवाजाही बंद है।
हालांकि, उन्होंने माना कि इस क्षेत्र में ऊंची पहाड़ियों पर चीनी सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं और कहा कि ऐसी गतिविधियों को लेकर स्थानीय ग्रामीणों की चिंताएं जायज़ हैं और उन पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
रिजिजू ने चीनी घुसपैठ के बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारी की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि अरुणाचल प्रदेश में चीन के 60 किलोमीटर अंदर तक घुसने के दावों को साबित करने के लिए बांग्लादेश और अन्य जगहों की ऐसी तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया जिनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
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