चीन(China) में आए टाइफून मेसाक के कारण हुई भारी बारिश के बाद 6 जुलाई 2026 को नानिंग के हेंगझोउ स्थित लियुलान बांध में करीब 50 मीटर लंबी दरार आ गई। इसके चलते निचले इलाकों में बाढ़ आ गई और एहतियात के तौर पर 48 हजार से 62 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
इस आपदा में कई लोगों के हताहत होने की खबर सामने आई है जिसकी वजह से बाढ़ से सड़क और बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई जबकि विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के बीच बांधों की नियमित निगरानी और समय पर जल निकासी को बेहद जरूरी बताया है।
लियुलान बांध क्यों है खास?
लियुलान बांध का निर्माण अगस्त 1958 में शुरू हुआ था और वर्ष 1960 में इसे पूरा किया गया। इसकी ऊंचाई करीब 111.20 मीटर है जो लगभग 50 मंजिला इमारत के बराबर मानी जाती है। इसकी जल भंडारण क्षमता लगभग 91 से 95 मिलियन घन मीटर है। इस बांध का मुख्य उद्देश्य कृषि सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, मत्स्य पालन और स्थानीय स्तर पर जलविद्युत उत्पादन है।
हाल ही में बांध में आई दरार की घटना ने बड़े बांधों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। चीन दुनिया में बड़े बांधों के लिए जाना जाता है लेकिन भारत भी इस क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति रखता है। देश में कई विशाल बांध हैं जो ऊंचाई, जल भंडारण क्षमता, बिजली उत्पादन और सिंचाई जैसी सुविधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं।
भारत के बड़े बांध भी हैं अहम
चीन की इस घटना के बाद भारत के बड़े बांधों की भी चर्चा तेज हो गई है। देश का सबसे ऊंचा टिहरी बांध उत्तराखंड में भागीरथी नदी पर बना है, जिसकी ऊंचाई 260.5 मीटर है। भाखड़ा नांगल बांध सतलुज नदी पर स्थित है और पंजाब, हरियाणा व राजस्थान की सिंचाई व्यवस्था की मजबूत कड़ी माना जाता है।
वहीं, सरदार सरोवर बांध नर्मदा नदी पर बना है जिससे गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के कई क्षेत्रों को पानी और सिंचाई की सुविधा मिलती है। इसके अलावा हीराकुंड, नागार्जुन सागर और इंदिरा सागर भी देश की प्रमुख जल परियोजनाओं में शामिल हैं।
उपयोग में मजबूत हैं भारतीय बांध
बांधों की संख्या और विशाल जलविद्युत परियोजनाओं के मामले में चीन दुनिया में अग्रणी है। हालांकि भारत के कई बांध ऊंचाई, इंजीनियरिंग क्षमता और बहुउद्देशीय उपयोग के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान रखते हैं। ये परियोजनाएं केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं हैं बल्कि सिंचाई, पेयजल, बाढ़ नियंत्रण और औद्योगिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि नियमित निरीक्षण, मजबूत रखरखाव और प्रभावी आपदा प्रबंधन किसी भी बड़े बांध की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी कदम हैं।