सोने के आभूषण खरीदने या निवेश करने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक झकझोरने वाली खबर सामने आई है। दुनिया की प्रमुख वित्तीय ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सॉक्स ने वैश्विक सर्राफा बाजार के रुझानों को देखते हुए भविष्यवाणी की है कि 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 4,900 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच सकता है। वर्तमान में सोना लगभग 4,550 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है, जिसका सीधा अर्थ है कि अगले चार महीनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की दरों में करीब 8 प्रतिशत की सीधी बढ़त देखने को मिल सकती है।
भारतीय सर्राफा बाजार में 1.69 लाख रुपये तक जा सकते हैं दाम
वैश्विक बाजार में 8 फीसदी की इस संभावित तेजी का गणित यदि भारतीय सर्राफा बाजार के हिसाब से समझें, तो यह घरेलू ग्राहकों की जेब पर भारी पड़ने वाला है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, नई दिल्ली सर्राफा बाजार में बीते दिन 24 कैरेट 10 ग्राम सोने का भाव 1,52,475 रुपये दर्ज किया गया था। अंतरराष्ट्रीय बाजार की 8 प्रतिशत की बढ़त यदि भारत में लागू होती है, तो 24 कैरेट 10 ग्राम सोने का रेट सीधे 1.69 लाख रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच सकता है।
रुपये की चाल और स्थानीय टैक्स बढ़ाएंगे महंगाई का बोझ
भारत अपनी सोने की कुल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिससे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिति सीधे तौर पर सोने के रेट को प्रभावित करती है। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला आयात शुल्क, स्थानीय जीएसटी और अन्य टैक्स मिलकर भारतीय बाजार में अंतिम खुदरा मूल्य को और अधिक महंगा बना देते हैं। ऐसे में यदि वैश्विक बाजार में सोने की कीमतें बढ़ती हैं, तो भारतीय बाजारों में इसकी महंगाई का असर कई गुना अधिक देखने को मिलेगा।
सेंट्रल बैंकों की अंधाधुंध खरीदारी और चीन की आक्रामक बाइंग
गोल्डमैन सॉक्स की रिपोर्ट के अनुसार, सोने के दाम में इस उफान का सबसे बड़ा कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही आक्रामक खरीदारी है। विभिन्न देशों के सेंट्रल बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिकी डॉलर के विकल्प के रूप में भारी मात्रा में सोना जुटा रहे हैं। रिपोर्ट का अनुमान है कि इस साल केंद्रीय बैंक औसतन 50 टन सोना प्रति माह खरीद सकते हैं, जबकि वर्ष 2021 में यह आंकड़ा महज 17 टन प्रति माह था। इस साल जून में यह खरीदारी उछलकर 100 टन प्रति माह तक पहुंच गई, जिसमें पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख और 2026 के भारी उतार-चढ़ाव
वर्ष 2026 में सोने की चाल बेहद उतार-चढ़ाव भरी रही है। 29 जनवरी 2026 को सोने ने 5,600 डॉलर प्रति औंस का ऑल-टाइम हाई छुआ था, लेकिन मुनाफावसूली के कारण जुलाई के मध्य में यह गिरकर 4,000 डॉलर के नीचे आ गया था। हालांकि, जुलाई के उस निचले स्तर से कीमतें अब तक फिर से 15 फीसदी तक सुधर चुकी हैं। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी न करने या संभावित कटौती के संकेतों से सोने में तेजी को बल मिल रहा है, क्योंकि मुद्रास्फीति नियंत्रित रहने पर बिना ब्याज वाली इस संपत्ति की मांग लगातार मजबूत बनी रहती है।
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