हिंदी और मराठी सिनेमा के मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर का आज 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सुनते ही फिल्मी जगत और राजनीति से जुड़ी दुनिया में शोक की लहर छा गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए दुख जताया, उन्होंने पोस्ट कर लिखा कि बहुत कम अभिनेताओं में वह जोश, अलग पहचान और दमदार मौजूदगी थी जो श्री नाना पाटेकर जी में थी। उन्होंने हर किरदार में कमाल की विविधता और रचनात्मकता दिखाई और हमें ऐसे पात्र दिए जिन्हें पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा। उन्हें उनकी बेबाक और स्पष्ट राय के लिए भी सराहा जाता था; वे अपनी बात कहने में कभी नहीं हिचकिचाते थे। हिंदी और मराठी सिनेमा में श्री नाना पाटेकर का योगदान बहुत बड़ा था। उनके जाने से एक बड़ी कमी महसूस हो रही है। उनके परिवार, दोस्तों और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति।
राजनीति से हमेशा बनाए रखी दूरी
बता दें कि नाना पाटेकर अपने बेबाक अंदाज और स्पष्ट विचारों के लिए भी पहचाने जाते थे। अभिनय के अलावा सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता अक्सर चर्चा में रहती थी। हालांकि उन्होंने कभी सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनने का फैसला नहीं किया।
नाना पाटेकर का मानना था कि राजनीति उनके स्वभाव के अनुकूल नहीं है। वह कई मौकों पर यह स्पष्ट कर चुके थे कि वह राजनीति में जाकर किसी दूसरे व्यक्ति की गलतियों या फैसलों की जिम्मेदारी अपने ऊपर नहीं लेना चाहते। इसी वजह से उन्होंने फिल्मी दुनिया में रहते हुए भी राजनीतिक करियर बनाने से दूरी बनाए रखी।
किसानों की मदद के लिए ठुकरा दी थी महंगी कार
नाना पाटेकर केवल फिल्मों में अपने दमदार अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। किसानों और उनके परिवारों की मदद से जुड़ा उनका एक किस्सा आज फिर चर्चा में है।
रिपोर्टों के मुताबिक, एक समय उन्हें करीब 1.5 करोड़ रुपये की लग्जरी कार लेने का मौका मिला था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने के बजाय किसानों के परिवारों की सहायता को प्राथमिकता दी। किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए उनके काम की कई बार सराहना भी हुई।
नाना पाटेकर का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है। अपनी दमदार अदाकारी, प्रभावशाली संवाद अदायगी और सामाजिक सरोकारों के चलते वह दर्शकों के बीच हमेशा एक अलग पहचान बनाए रखेंगे।

