Prediction About Humanity: 2050 तक दुनिया खत्म होने की बात सुनकर यह किसी साइंस-फिक्शन कहानी जैसी लग सकती है, लेकिन अमेरिकी इतिहासकार और लेखक जेरेड डायमंड ने एक इंटरव्यू के दौरान वैश्विक सभ्यता के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने अनुमान लगाया कि करीब 49 प्रतिशत संभावना है कि 2050 तक ‘दुनिया जैसी हम जानते हैं’ वह व्यवस्था ढह सकती है। यह कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं थी, बल्कि उनका व्यक्तिगत आकलन था।
किस बात का है खतरा?
डायमंड की चिंता किसी एक युद्ध या प्राकृतिक आपदा तक सीमित नहीं थी। उनका मुख्य फोकस उन प्राकृतिक संसाधनों पर था, जिन पर आधुनिक सभ्यता निर्भर करती है। उन्होंने कहा था कि मछलियों के भंडार, कृषि व्यवस्था, उपजाऊ मिट्टी और मीठे पानी जैसे जरूरी संसाधनों का इस्तेमाल दुनिया के कई हिस्सों में टिकाऊ तरीके से नहीं हो रहा है।
संसाधनों पर बढ़ता दबाव?
डायमंड के मुताबिक, अगर संसाधनों के इस्तेमाल का मौजूदा तरीका लंबे समय तक जारी रहा तो आने वाले दशकों में इन पर दबाव बढ़ सकता है। उनका तर्क था कि जटिल आधुनिक समाजों को चलाने वाले संसाधनों का अस्थायी या अत्यधिक इस्तेमाल हमेशा जारी नहीं रखा जा सकता। उन्होंने विशेष रूप से वैश्विक मत्स्य संसाधन, खेती, मिट्टी और मीठे पानी की ओर ध्यान दिलाया था।
2050 को क्यों बताया अहम?
डायमंड का अनुमान था कि मौजूदा अस्थायी व्यवस्था कुछ दशकों तक चल सकती है, लेकिन करीब 2050 तक दुनिया को यह तय करना होगा कि वह संसाधनों के इस्तेमाल का ज्यादा टिकाऊ रास्ता अपनाती है या नहीं। उनके मुताबिक उस समय तक यह स्पष्ट हो सकता है कि मानव समाज ने इन समस्याओं से निपटने के लिए पर्याप्त बदलाव किए हैं या नहीं।
सिर्फ डरावना भविष्य नहीं
डायमंड ने भविष्य को पूरी तरह निराशाजनक नहीं बताया था। उन्होंने कहा था कि वह सावधानी के साथ आशावादी हैं और उनके अनुसार इंसानों के सामने मौजूद कई समस्याएं ऐसी हैं, जिन्हें इंसान खुद पैदा करता है और इसलिए उन्हें हल करने की क्षमता भी रखता है। उन्होंने टिकाऊ तरीके से संसाधनों के प्रबंधन को अहम बताया।
बदलाव की जरूरत
डायमंड के विचार का मूल संदेश यह था कि सरकारों, कंपनियों और आम लोगों को संसाधनों के इस्तेमाल के तरीके पर दोबारा विचार करना होगा। ईंधन की खपत कम करना, परिवहन और ऊर्जा के अधिक टिकाऊ तरीकों को अपनाना और पानी, खेती और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन जैसे कदम इस चुनौती से जुड़े हैं।
क्या सच में खत्म हो जाएगी दुनिया?
डायमंड के 49% वाले अनुमान का मतलब यह नहीं है कि 2050 में पृथ्वी या इंसान निश्चित रूप से खत्म हो जाएंगे। उनका कथन आधुनिक सभ्यता की मौजूदा व्यवस्था के संभावित वैश्विक संकट और उसके ढहने के खतरे से जुड़ा था। इसलिए इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय एक चेतावनी और संसाधनों के टिकाऊ इस्तेमाल पर विचार करने वाले आकलन के रूप में समझना ज्यादा सही है।
Read More:
टॉम क्रूज के साथ अवनीत कौर ने लूटी लाइमलाइट, ‘डिगर’ प्रीमियर से सामने आईं ग्लैमरस तस्वीरें

