विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस सप्ताह न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जयशंकर 26 सितंबर को महासभा के आम बहस सत्र को संबोधित करेंगे। अपने दौरे के दौरान वह कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों में भी हिस्सा लेंगे।
ऊर्जा खरीद को लेकर चर्चा संभव
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का न्यूयॉर्क दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर चर्चा जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को लिंडसे ओ. ग्राहम एक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने का प्रावधान बताया गया है। भारत ने इस मुद्दे पर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, नई दिल्ली ने 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा जरूरतों को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
द्विपक्षीय संबंधों पर असर की चिंता
विदेश मंत्रालय ने बताया कि हाल के महीनों में अमेरिकी वार्ताकारों के साथ उच्च स्तर पर इस विषय पर बातचीत हुई है। भारत ने संभावित दंडात्मक कदमों से द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। इसी बीच भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत जारी है। UNGA के दौरान दोनों देशों के अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा की संभावना भी रहेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 22 सितंबर को अपने दूसरे कार्यकाल में दूसरी बार संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भी उच्च स्तरीय सत्र में शामिल होने की संभावना है। ऐसे में जयशंकर की साइडलाइन बैठकें भारत-अमेरिका संबंधों और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत का अवसर दे सकती हैं।
22 से 28 सितंबर तक आम बहस
UNGA की वार्षिक आम बहस 22 से 28 सितंबर तक चलेगी। इस वर्ष इसकी थीम ‘विश्वास बहाल करना, परिवर्तन का प्रबंधन: एक संयुक्त राष्ट्र जो सभी के लिए परिणाम दे’ रखी गई है। 193 सदस्यीय महासभा के 81वें सत्र की अध्यक्षता बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान कर रहे हैं। यह सत्र अमेरिका-ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट जैसे भू-राजनीतिक संकटों के बीच हो रहा है। इन घटनाक्रमों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है और खाद्य तथा ईंधन कीमतों पर भी असर पड़ा है।
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