अगर आप भी नया आईफोन खरीदते ही उस पर महंगा स्क्रीन प्रोटेक्टर या टेम्पर्ड ग्लास लगवा लेते हैं, तो ऐपल के शीर्ष अधिकारी की यह सलाह आपके काम आ सकती है। ऐपल के हार्डवेयर इंजीनियरिंग चीफ टॉम मरीब ने खुलासा किया है कि उन्हें खुद आईफोन की स्क्रीन पर बाहरी प्रोटेक्टर लगाना बिल्कुल पसंद नहीं है। उनका कहना है कि कंपनी अपने डिवाइसेस की स्क्रीन को खुद इतना टिकाऊ बनाती है कि यूजर्स को किसी अतिरिक्त प्रोटेक्टर की जरूरत ही न पड़े।
3 गुना अधिक मजबूत तकनीक
ऐपल के अनुसार, कंपनी द्वारा विकसित की गई नई Ceramic Shield 2 तकनीक डिस्प्ले सुरक्षा के मामले में एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। यह नई तकनीक पुराने सेरामिक शील्ड के मुकाबले तीन गुना अधिक खरोंच-रोधी है। इसे सबसे पहले iPhone 17 सीरीज के साथ पेश किया गया था और अब यह लेटेस्ट मॉडल्स का हिस्सा है। कंपनी ने प्रयोगशालाओं में ऐसे एडवांस टेस्ट तैयार किए हैं, जो सालों के सामान्य इस्तेमाल के असर की जांच कुछ ही समय में कर लेते हैं।
टच और प्रीमियम फील पर असर
ऐपल की इंजीनियरिंग टीम डिस्प्ले को इस तरह डिजाइन करती है कि यूजर्स को एकदम स्मूथ टच रिस्पॉन्स और प्रीमियम फील मिले। टॉम मरीब के अनुसार, जब कोई यूजर स्क्रीन पर अलग से टेम्पर्ड ग्लास या प्रोटेक्टर लगाता है, तो इससे फोन का ओरिजिनल टच एक्सपीरियंस और विजुअल क्वालिटी प्रभावित होती है। कंपनी का लक्ष्य रहता है कि यूजर बिना किसी रुकावट के फोन के ओरिजिनल ग्लास का ही आनंद ले सके।
खरोंच और गिरावट में अंतर समझना जरूरी
स्क्रीन प्रोटेक्टर न लगाने की सलाह के बीच एक तकनीकी पहलू को समझना बहुत जरूरी है। दरअसल, स्क्रैच रेजिस्टेंस और ड्रॉप प्रोटेक्शन दो पूरी तरह से अलग चीजें हैं। Ceramic Shield 2 तकनीक आपकी स्क्रीन को चाबियों, सिक्कों और रोजमर्रा के इस्तेमाल में लगने वाली खरोंचों से काफी हद तक सुरक्षित रखती है, लेकिन यह फोन के किसी कठोर सतह पर गिरने पर स्क्रीन के पूरी तरह न टूटने की गारंटी नहीं देती।
यूजर की अपनी पसंद
हालांकि ऐपल का स्पष्ट मानना है कि उनका इन-बिल्ट ग्लास ही सुरक्षा के लिए पर्याप्त है, फिर भी फोन गिरने पर होने वाली महंगी रिपेयरिंग के डर से बचाव के लिए स्क्रीन प्रोटेक्टर का इस्तेमाल पूरी तरह से यूजर की अपनी व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है।
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