Public Examination Amendment Bill: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। लोकसभा के बाद अब राज्यसभा ने भी पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। 29 जुलाई 2026 को लोकसभा से पारित होने के बाद 30 जुलाई 2026 को यह विधेयक राज्यसभा से भी पास हो गया है। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून पूरे देश में लागू हो जाएगा। यह कानून NTA के साथ-साथ दूसरी सार्वजनिक परीक्षाओं पर भी लागू होगा।
छात्रों के हित में बड़ा फैसला
सरकार का कहना है कि यह कानून देश के करोड़ों प्रतियोगी परीक्षार्थियों के हितों की रक्षा के लिए लाया गया है। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाना और छात्रों का भरोसा मजबूत करना है। इससे NEET, UPSC, SSC समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
पेपर लीक पर सख्त सजा का प्रावधान
नए कानून में परीक्षा से जुड़ी धांधली करने वालों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति व्यक्तिगत स्तर पर परीक्षा में चीटिंग करता है या पेपर लीक कराने में शामिल पाया जाता है, तो उसे कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा दोषी पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।
संगठित गिरोहों पर और कड़ी कार्रवाई
विधेयक में पेपर लीक कराने वाले संगठित माफिया और सिंडिकेट के खिलाफ और भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कम से कम 7 साल और ज्यादा से ज्यादा 10 साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही संबंधित गिरोह पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है, ताकि शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई हो सके।
60 दिन में जांच, 90 दिन में फैसला
पेपर लीक मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने की समस्या को देखते हुए इस कानून में समय-सीमा भी तय की गई है। अब जांच एजेंसियों को किसी भी पेपर लीक मामले की जांच 60 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। वहीं, चार्जशीट दाखिल होने के बाद विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट को 90 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाना होगा। इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएंगे।
परीक्षार्थियों को कैसे मिलेगा फायदा?
इस कानून का सबसे बड़ा लाभ उन लाखों युवाओं को मिलेगा जो सालों तक मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। पहले पेपर लीक के मामलों में जांच और सुनवाई लंबी चलने के कारण परीक्षाएं रद्द होती थीं और छात्रों का भविष्य प्रभावित होता था। अब तय समय-सीमा में जांच और अदालत के फैसले से मामलों का तेजी से निपटारा होगा। इससे परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी और योग्य अभ्यर्थियों का चयन अधिक पारदर्शी तरीके से हो सकेगा।
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