हिमाचल प्रदेश सरकार ने राजधानी शिमला(Shimla) में लगातार बढ़ रहे निर्माण कार्यों को नियंत्रित करने के लिए अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शहर के प्रमुख कोर एरिया के अधिकांश हिस्से को ‘नो कंस्ट्रक्शन ज़ोन’ घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस फैसले का उद्देश्य शिमला की प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और पर्यावरणीय संतुलन को सुरक्षित रखना है।
सरकार के इस निर्णय के लागू होने के बाद शिमला के कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में नए निजी मकानों और व्यावसायिक इमारतों के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, जनहित से जुड़े सरकारी भवनों के निर्माण और पुराने भवनों के मूल स्वरूप के अनुसार पुनर्निर्माण को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है ताकि आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं पर कोई असर न पड़े।
किन क्षेत्रों में लागू होगा फैसला?
नगर एवं ग्राम नियोजन (टीसीपी) विभाग जल्द ही इस संबंध में मसौदा अधिसूचना जारी करेगा और आम लोगों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित करेगा। प्रस्ताव के अनुसार संजौली सड़क के ऊपरी हिस्से, कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी), लक्कड़ बाजार, रिज मैदान, रानी झांसी पार्क, मॉल रोड, इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, क्लार्क्स होटल, ओक ओवर, छोटा शिमला और वापस संजौली तक का बड़ा इलाका इस प्रतिबंध के दायरे में आएगा। इन क्षेत्रों में भविष्य में निजी निर्माण कार्य की अनुमति नहीं मिलेगी।
हरियाली को सुरक्षित रखने की पहल
नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य शिमला की हरियाली और प्राकृतिक आकर्षण को संरक्षित करना है। उनके अनुसार लोग शिमला की खूबसूरत वादियों, जंगलों और शांत वातावरण का आनंद लेने आते हैं इसलिए अनियंत्रित निर्माण पर रोक जरूरी है।
विकास योजना से जुड़ा है फैसला
सरकार के अनुसार जिन क्षेत्रों में निर्माण पर रोक लगाई जा रही है वे पहले उन 17 ग्रीन बेल्ट क्षेत्रों का हिस्सा थे जिन्हें शिमला डेवलपमेंट प्लान-2041 के तहत आवश्यकता के आधार पर निर्माण के लिए खोला गया था। इस विकास योजना को 11 जनवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी भी मिल चुकी थी। अब सरकार पर्यावरण संरक्षण और संतुलित विकास को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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