उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए अब सिर्फ निवेश और बुनियादी ढांचे पर ही नहीं, बल्कि कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार का फोकस सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों, कारीगरों और तकनीशियनों को प्रशिक्षित करने और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने पर है। उद्योग जगत का मानना है कि अनुभवी कर्मचारी ही उत्पादन क्षमता बढ़ाने, गुणवत्ता बनाए रखने और वैश्विक में उद्योगों को मजबूत करने की सबसे बड़ी जरूरत है।
96 लाख MSMEs को मजबूत करने की रणनीति
उत्तर प्रदेश में करीब 96 लाख MSMEs संचालित हैं, जिन्हें राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। सरकार का लक्ष्य इन इकाइयों को केवल वित्तीय सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें कुशल श्रमिक, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार उपलब्ध कराना भी है। औद्योगिक विशेषज्ञों का कहना है कि आज किसी भी राज्य की सफलता केवल नए कारखाने स्थापित करने से नहीं, बल्कि प्रशिक्षित कार्यबल, स्थानीय उद्योगों की मजबूती और बदलती बाजार जरूरतों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता से तय होती है।
ODOP योजना से पारंपरिक उद्योगों को मिला सहारा
सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत मुरादाबाद के पीतल उद्योग, मेरठ के खेल सामग्री उद्योग, भदोही के कालीन, कन्नौज के इत्र, वाराणसी की रेशमी साड़ियां और अलीगढ़ के ताला उद्योग जैसे पारंपरिक उत्पादों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग, डिजाइन सुधार और तकनीकी उन्नयन में सहायता दी जा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 से अब तक 1.46 लाख से अधिक कारीगरों को ट्रेनिंग दिया गया, जबकि 20 हजार से ज्यादा उद्यमियों को सीधे लाभ मिला है। इस योजना के जरिए 3.16 लाख से अधिक रोजगार के अवसर भी मिले हैं।
कारीगरों और निर्यातकों ने बताए फायदे
मुरादाबाद के पद्मश्री सम्मानित शिल्पकार दिलशाद हुसैन का कहना है कि ODOP के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में पीतल उत्पादों की पहचान मजबूत हुई है। वहीं अमरोहा के फर्नीचर कारीगर जितेंद्र सैनी के अनुसार, योजना से मशीनरी, कच्चे माल और कारोबार विस्तार के लिए वित्तीय सहयोग मिलने लगा है। उद्यमी अमित गोयल ने बताया कि स्थानीय हस्तशिल्प अब प्रदर्शनियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश-विदेश के ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। निर्यातक फिरोज अहमद का कहना है कि गुणवत्ता और ब्रांडिंग में सुधार से कई पारंपरिक उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ी है।
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